...तो फिर प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री को रतलाम में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में चेंबर के बाहर बैठना पड़ा जमीन पर
⚫ मामला मीसाबंदी के प्लाट पर अवैध कब्जे का
⚫ चार दिन पहले पूर्व गृहमंत्री ने इस मामले में की थी पुलिस अधीक्षक से विस्तृत चर्चा
⚫ दीनदयाल नगर थाना प्रभारी को एसपी ने दिए निर्देश
हरमुद्दा
रतलाम,20 मई। मीसा बंदी के प्लाट पर से अवैध कब्जा हटाने की बात को लेकर कुछ दिन पहले प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार से मिले थे। मगर कार्रवाई नहीं हुई तो बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अंदर चेंबर के सामने श्री कोठारी जमीन पर बैठ गए। मुद्दा गर्माया।

ऐसा लगता है कि जिले में भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व खत्म हो रहा है और पुलिस पावर बढ़ रहा है। जब भारतीय जनता पार्टी के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ नेता हिम्मत कोठारी की बात को भी पुलिस महक में द्वारा तवज्जो नहीं दी जाती है तो आम जनता का क्या हश्र होता होगा, भली-भांति समझ सकते हैं।
तो एसपी ले गए उन्हें चेंबर में
जैसे ही पूर्व गृह मंत्री के चेंबर के बाहर जमीन पर बैठने की सूचना पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को मिली, वे तुरंत बाहर आए। समझाकर श्री कोठारी को जमीन से उठाया और चेंबर में ले गए।
दिया ठोस कार्रवाई का आश्वासन
एसपी कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व गृह मंत्री को निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करने सहित आरोपियों के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज करने का ठोस आश्वासन दिया।
थाना प्रभारी को तुरंत केस दर्ज करने के निर्देश
मामले में पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए दीनदयाल नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव को निर्देशित किया कि वे इस मामले में तुरंत पुलिस प्रकरण (एफआईआर) दर्ज करें।
चार दिन पहले भी दी थी चेतावनी
उल्लेखनीय है कि पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने चार दिन पूर्व भी इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की थी। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए उचित कार्रवाई और पुलिस केस दर्ज करने की मांग की थी। लेकिन कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज होकर आखिरकार उन्हें बुधवार को यह कदम उठाना पड़ा।
... तो पार्टी छोड़ने इसमें भी पीछे नहीं रहूंगा
चेंबर में चर्चा के बाद पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने साफ लफ्जों में मीडिया और प्रशासन से कहा "अगर मीसा बंदियों को उनका प्लॉट वापस नहीं दिलाया गया और दोषियों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं आमरण अनशन पर बैठूँगा। इस संबंध में मैं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व (पार्टी मुखिया) से भी बात करूँगा। इसके बावजूद अगर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो मैं पार्टी छोड़ने से भी पीछे नहीं हटूंगा और सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करूँगा।"
Hemant Bhatt