धर्म संस्कृति : राष्ट्र को भगवान मानकर सेवा और भक्ति करना" भारतीय संस्कृति का एक उच्च आदर्श
⚫ आचार्य प्रवर श्री गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी ने कहा
⚫ पितरों की स्मृति में जोशी परिवार द्वारा श्री कुबेरेश्वर महादेव मंदिर दीनदयाल नगर में आयोजन
⚫ कथा का विश्राम 14 फरवरी को
हरमुद्दा
रतलाम, 13 फरवरी। राष्ट्र को भगवान मानकर सेवा और भक्ति करना" भारतीय संस्कृति का एक उच्च आदर्श है, जो देशभक्ति को केवल राजनैतिक भावना न मानकर एक आध्यात्मिक संकल्प मानता है। उसका और परिवार का कल्याण अवश्य है। प्रत्येक भारतीय का यह भी कर्त्तव्य हैं कि वह राष्ट्र के कण-कण में दिव्यता देखे और उसकी सेवा को ईश्वर की पूजा (नर सेवा ही नारायण सेवा) समझना चाहिए।

यह विचार आचार्य प्रवर गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी ने व्यक्त किए। आचार्य श्री चतुर्वेदी श्री शिवमहा पुराण कथा अमृत महोत्सव में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। धर्मनिष्ठ सुरेशचन्द्र जोशी ने बताया पितृ पुरुष पंडित भवानी शंकर जोशी, लक्ष्मीदेवी जोशी, प्रभु दयाल जोशी, शांति देवी जोशी, वासुदेव जोशी, प्रमोद शर्मा एवं नीता जोशी की पुण्य स्मृति में श्री शिव महापुराण कथा अमृत महोत्सव श्री कुबेरेश्वर महादेव मंदिर 330 -331 दीनदयाल नगर 8 फरवरी से किया जा रहा है। 14 फरवरी को सुबह 11 बजे कथा शुरू होगी।

मानव सेवा में भगवान का वास
श्री चतुर्वेदी ने कहा कि भारत माता को साक्षात देवी मानकर उसकी सेवा करना चाहिए। इसमें देश की जनता, विशेषकर पिछड़ों, गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना शामिल है, क्योंकि मानव में ही भगवान का वास होता है। दैनिक कार्यों, पेशे और जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना ही राष्ट्र-भक्ति है। व्यक्तिगत स्वार्थ, जाति, धर्म और क्षेत्रीयता से ऊपर उठकर राष्ट्र के कल्याण को प्राथमिकता देना चाहिए। राष्ट्र की एकता, अखंडता और विकास के लिए स्वयं को समर्पित करना।
मानसिक शांति और संतुलन के लिए जीवन में आवश्यक संयम नियम
आचार्य प्रवर चतुर्वेदी ने कहा जीवन में नियम (अनुशासन) और संयम (आत्म-नियंत्रण) सफलता, उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। नियम समय का सदुपयोग, आलस्य का त्याग और लक्ष्यों को प्राप्त करना सिखाते हैं, जबकि संयम इन्द्रियों, विचारों और क्रोध पर नियंत्रण रखकर जीवन को स्थिर और निर्विघ्न बनाते हैं। सादा जीवन, उच्च विचार और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जीवन के मूलभूत नियम होना चाहिए। संयम के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों और कार्यों को सही दिशा में मोड़कर एक बेहतर जीवन जी सकता है।
पर्यटन और धार्मिक यात्रा में ही काफी अंतर
आचार्य प्रवर चतुर्वेदी ने कहा पर्यटन और धार्मिक यात्रा अंतर है। पर्यटन जहाँ मनोरंजन, आराम और नई जगहों की खोज के लिए की जाती है, वहीं तीर्थयात्रा श्रद्धा, आत्म-शुद्धि और ईश्वर से जुड़ने के लिए की जाती है, जिसमें अनुशासन और पवित्रता का पालन अनिवार्य होता है।
मानवता को तार्किक, नैतिक और आध्यात्मिक मार्ग दिखाया महर्षि गौतम ने
श्री चतुर्वेदी ने कहा महर्षि गौतम वैदिक काल के सप्तर्षियों में से एक और न्याय दर्शन के प्रणेता हैं, जिन्होंने न्यायशास्त्र, 'गौतम धर्मसूत्र' और 'त्रयंबकेश्वर ज्योतिष' के माध्यम से मानवता को तार्किक, नैतिक और आध्यात्मिक मार्ग दिखाया। 'गोदावरी' (गौतमी) को पृथ्वी पर लाने वाले ऋषि ने समाज को शिक्षा और धर्मपरायणता का संदेश दिया।
14 फरवरी को कथा का विश्राम

कथा विश्राम के बाद दोपहर 3 बजे हवन होगा। कथा के मुख्य यजमान पंडित कौशलेश सुरेश जोशी एवं श्रीमती श्रुति कौशलेश जोशी है धर्मालु सुशीला देवी जोशी पंडित रघुनंदन जोशी, शकुंतला जोशी, सुमन लता जोशी मनकामेश्वर जोशी, डॉ. राजेश जोशी, गिरीश जोशी, दिनेश जोशी, महेश जोशी, मंजुला जोशी, कुसुम जोशी, संगीता जोशी, तृप्ति जोशी, चेतना जोशी भक्तों से कथा श्रवण करने का आह्वान किया है।
Hemant Bhatt