सेहत सरोकार : 'दस्तक अभियान' का पीट रहे ढिंढोरा, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य ढांचा खुद बीमार

सेहत सरोकार : 'दस्तक अभियान' का पीट रहे ढिंढोरा, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य ढांचा खुद बीमार

स्वास्थ्य दावों के बीच 'लापरवाही' का दस्तक अभियान 

⚫ आदिवासी अंचल कुंवरपाड़ा में अवकाश प्रतिबंध के बावजूद CHO प्रियंका पाटीदार गायब

⚫ रावटी में नर्सिंग स्टाफ का टोटा

⚫ नई इमारत तैयार, पर बुनियादी सुविधाएं नदारद

हरमुद्दा
​रतलाम, 18 जुलाई। जिले में नौनिहालों को कुपोषण और बाल्यकालीन बीमारियों से बचाने के लिए 'दस्तक अभियान' का ढिंढोरा तो पीटा जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य ढांचा खुद बीमार नजर आ रहा है। शनिवार को जब सीएमएचओ डॉक्टर किरण वाडिवा आदिवासी अंचल में पहुंची तो उन्होंने पाया कि आदिवासी अंचल कुंवरपाड़ा में अवकाश पर प्रतिबंध के बावजूद CHO प्रियंका पाटीदार गायब थी। रावटी में नर्सिंग स्टाफ का टोटा दिखा। आड़ापंथ में नई इमारत आयुष्मान आरोग्य मंदिर तैयार, पर बुनियादी सुविधाएं बिजली पानी नहीं। 


शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. किरण वाडिवा द्वारा किए गए औचक निरीक्षण ने विभागीय मुस्तैदी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। अभियान के संवेदनशील समय में कहीं जिम्मेदार अधिकारी ड्यूटी से नदारद मिले, तो कहीं महत्वपूर्ण केंद्रों पर स्टाफ की कमी सामने आई है।

वीआईपी अभियान में भी CHO 'लापता', अवकाश पर रोक के बावजूद बड़ी लापरवाही

जानकारी लेते हुए सीएमएचओ डॉक्टर किरण वाडिवा

अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने इसमें किसी भी प्रकार के अवकाश पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद, आयुष्मान आरोग्य मंदिर कुंवरपाड़ा में सीएचओ (CHO) प्रियंका पाटीदार अनुपस्थित पाई गईं। 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए, आयरन की गोलियां और कुपोषण से बचाने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान के दौरान केंद्र प्रभारी का इस तरह गायब होना विभाग के लचर प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाता है।

​रावटी स्वास्थ्य केंद्र: 3 डॉक्टर, लेकिन नर्सिंग ऑफिसर 'शून्य'

​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रावटी की स्थिति तो और भी चिंताजनक है। कहने को तो यहां 3 चिकित्सक पदस्थ हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान दो नर्सिंग ऑफिसर का स्थानांतरण होने के कारण स्टाफ की भारी कमी पाई गई। प्रसव जैसी अति-संवेदनशील और आपातकालीन सेवाओं के लिए डॉक्टरों के साथ नर्सिंग स्टाफ का होना अनिवार्य है। ऐसे में बिना नर्सिंग ऑफिसर्स के केंद्र पर "गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाओं" का दावा केवल कागजी नजर आता है। सीएमएचओ को खुद मौके पर पहुंचकर जल्द व्यवस्था सुधारने के निर्देश देने पड़े।

​नई इमारत तैयार, पर बुनियादी सुविधाएं नदारद

​आड़ापंथ का आयुष्मान आरोग्य मंदिर जहां न बिजली है ना पानी। वहां पर फोटो सेशन करते हुए

प्रशासनिक अदूरदर्शिता का एक और नमूना आयुष्मान आरोग्य मंदिर आड़ापंथ में देखने को मिला। यहां भवन तो नया बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन इसमें बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। बिना बिजली-पानी के यह केंद्र किस प्रकार मरीजों को 'आरोग्य' प्रदान कर रहा होगा, यह समझने के लिए किसी विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है।
सीएमएचओ ने डॉ. पीयूष मांगरिया को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग लेने के निर्देश जारी किए हैं।

​कागजी मॉनिटरिंग या धरातल पर सुधार?

​हालांकि, निरीक्षण के दौरान एनवीबीडीसीपी सलाहकार डॉ. प्रमोद प्रजापति और डीसीएम कमलेश मुवेल जैसे आला अधिकारी सीएमएचओ के साथ मौजूद रहे और कमियों को दूर करने के लिए जिला क्वालिटी मैनेजर व नर्सिंग मेंटर के दल को रावटी भेजने की बात कही गई है।

मुद्दे की बात


अधिकारी गायब, बुनियादी सुविधाओं का अभाव

जब जिले के मुख्य केंद्रों पर अभियान के बीच में अधिकारी गायब हैं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, तो क्या ऐसे माहौल में रतलाम के नौनिहालों को कुपोषण और एनीमिया से पूरी तरह मुक्ति मिल पाएगी? देखना होगा कि इन कमियों को उजागर होने के बाद विभाग केवल नोटिस जारी करता है या धरातल पर कोई ठोस सुधार होता है।