देश के आयकर अधिनियम में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव, बनाया सरल और आसान

देश के आयकर अधिनियम में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव, बनाया सरल और आसान

आयकर अधिकारी एसपी डागर ने जागरूकता कार्यशाला में कहा 

⚫ क्लिष्ट शब्दों के मकड़जाल में घिरा हुआ था कर का पुराना अधिनियम : दिलीप पाटनी

⚫ अधिनियम की भाषा को बनाया सरल, अप्रचलित प्रावधानों को हटाया

हरमुद्दा
रतलाम, 14 मार्च। भारत सरकार ने आयकर अधिनियम, 2025 के माध्यम से देश के प्रत्यक्ष कर ढांचे (Direct Tax Structure) में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। इसमें बड़े परिवर्तन नहीं हुए। अनावश्यक प्रावधानों को हटाया गया है। नए अधिनियम का उद्देश्य जटिलताओं को कम करना है।  यह नया अधिनियम 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा और 1 अप्रैल, 2026 से पूरी तरह प्रभावी होगा। कर वर्ष की अवधारणा हैं। 

यह बात आयकर अधिकारी एसपी डागर ने बताई। श्री डागर जागरूकता कार्यशाला में पत्रकारों को जानकारी दे रहे थे। इस दौरान श्री डागर के साथ कर सलाहकार परिषद के दिलीप पाटनी एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट एसोसिएशन के आकाश मित्तल मौजूद थे।

कार्यशाला में मौजूद श्री डागर, श्री पाटनी एवं श्री मित्तल

श्री डागर ने दो दर्जन से अधिक स्लाइट के माध्यम से नए अधिनियम को स्पष्ट रूप से बताया। पहले क्या था और अब क्या हुआ है। सब दिखाया और समझाया

धाराओं को कर दिया कम

आयकर अधिकारी श्री डागर जानकारी देते हुए

श्री डागर ने बताया कानून की भाषा को आसान बनाया गया है। लगभग 1,200 प्रावधानों और 900 स्पष्टीकरणों को हटाकर कानून को छोटा और स्पष्ट किया गया है। ​पुराने अधिनियम की 800 से अधिक धाराओं को घटाकर लगभग 536 कर दिया गया है। कर दाताओं को अपनी रिटर्न अपडेट करने के लिए अब 2 साल के बजाय 4 साल का समय मिलेगा।

काफी जटिलताओं और भ्रम से भरा हुआ था कर का पुराना अधिनियम

कर सलाहकार परिषद के श्री दिलीप पाटनी विचार व्यक्त करते हुए

कर सलाहकार परिषद के दिलीप पाटनी ने कहा कि 1961 में बनाया हुआ आयकर अधिनियम काफी जटिलता और भ्रम की स्थितियों से भरा हुआ था। बार-बार लगातार कई पक्ष जोड़ने के कारण पैंचिदगिया  अधिक थी। विशेषज्ञ और कर सलाहकार सदैव भ्रम पैदा करने वाले अधिनियम को ठीक करने के बारे में बताते रहे कि देश में आयकर का इतना क्लिष्ट कानून क्यों है? जितनी बार पढ़ते थे, उतनी बार अलग-अलग मीनिंग्स आते थे। इसके चलते भ्रम की स्थिति पैदा होती थी। कर दाताओं के लिए हल खोजने में काफी मुसीबत होती थी। क्लिष्ट शब्दों के मकड़जाल में घिरा हुआ था। 

आमजन के पालन के लिए उपयुक्त

श्री पाटनी ने कहा अब इस अधिनियम की भाषा को सरल बनाया गया है, अप्रचलित प्रावधानों को हटाया गया है तथा प्रावधानों को मजबूत एवं पुनर्गठित किया गया है। प्रशासनिक बोझ को कम करने का प्रयास करता है। ताकि आमजन इसका पालन कर सकें। आयकर अधिनियम, 2025 का पारित होना एक सुव्यवस्थित, सरलीकृत कर व्यवस्था के निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक विकास है।

श्री डागर का किया सम्मान

जागरूकता कार्यशाला के प्रारंभ में कर सलाहकार परिषद की ओर से श्री डागर का सम्मान किया गया। चार्टर्ड अकाउंटेंट एसोसिएशन के आकाश मित्तल, अशोक भंडारी ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन कर निरीक्षक शिंबु कुमावत ने किया। आभार निशांत लोखंडे ने माना।