राष्ट्रीय एकता संगोष्ठी 2025 : भारत-भारती का अभिनव प्रयास, रतलाम में विविधता में एकता का संकल्प
⚫ संगोष्ठी केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना : पत्राले
⚫ भाषा, वेशभूषा, परंपराओं को साझा करने की जरूरत
⚫ आयोजन समिति की घोषणा
हरमुद्दा
रतलाम, 6 जुलाई। भारत-भारती द्वारा आयोजित राष्ट्रीय एकता संगोष्ठी ने रतलाम की सांस्कृतिक भूमि पर एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण रच दिया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रांतों से रतलाम में बसे नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन ने विविधता में एकता के सजीव दर्शन कराए और एक नए सामाजिक संवाद की शुरुआत की।
संगोष्ठी केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना : पत्राले

मुख्य अतिथि विनय पत्राले जी जो भारत-भारती के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं, ने कहा “यह संगोष्ठी केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना है। हम रतलाम को भारत का लघु रूप मानते हैं, जहाँ पंजाब का उत्साह, बंगाल की संवेदनशीलता, राजस्थान की सांस्कृतिक गरिमा और दक्षिण भारत की व्यावहारिकता एक साथ साकार हो रही हैं। भारत-भारती इसी भावना को सुदृढ़ करने का माध्यम है।” उन्होंने राष्ट्रीय एकता को केवल राजनैतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय स्तर पर सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।
भाषा, वेशभूषा, परंपराओं को साझा करने की जरूरत
श्री गुस्ताद अंकलेसरिया ने कहा “आज जब देश विविधता की चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में यह एकता संगोष्ठी समाज में संवाद, सहिष्णुता और सशक्तिकरण का मंत्र लेकर आई है। हमें अपनी भाषा, वेशभूषा और परंपराओं को साझा करना चाहिए, ताकि हमारी जड़ें मजबूत हों और शाखाएँ विश्व में फैल सकें।”
आयोजन समिति की घोषणा
इस अवसर पर श्रीमती अदिति दवेसर, एडवोकेट को रतलाम संयोजक नियुक्त किया गया। साथ ही, प्रवीण रामावत को सह-संयोजक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई। आयोजन समिति में विक्रम चौधरी, राकेश यादव, राहुल सक्सेना, विम्पी छाबड़ा, प्रवीणा दवेसर, हितेश पाठक, किरण दीक्षित, विशाल चतुर्वेदी, मीनाक्षी मलिक सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने सक्रिय योगदान दिया। संचालन रवींद्र उपाध्याय ने किया।
हमारी भावनाओं का संगम

कार्यक्रम के अंत में अदिति दवेसर ने बड़ी विनम्रता के साथ सभी अतिथियों, उपस्थित नागरिकों और आयोजकों का धन्यवाद दिया। उनके शब्दों ने समारोह को एक आत्मीय समापन प्रदान किया:
“यह केवल एक मंच नहीं था, यह हमारी भावनाओं का संगम था। मैं आप सभी का हृदय से धन्यवाद करती हूँ कि आपने इस एकता के पर्व को अपनी उपस्थिति से सार्थक बनाया। विशेष रूप से मुख्य अतिथि श्री विनय पत्राले जी, अध्यक्ष श्री कमल वसले जी, और सभी वक्ताओं ने जो विचार साझा किए, वे हमारे दिलों में राष्ट्रीय चेतना का दीप जला गए हैं।“भारत-भारती ने जो बीज बोया है, वह निश्चित रूप से एकता और सौहार्द के विशाल वृक्ष में परिवर्तित होगा। आइए, हम सभी मिलकर इसे सींचें, इसे बचाएं और इसे हर दिल में रोपें।”

समापन संदेश
कार्यक्रम के अंत में भारत-भारती की ओर से यह संकल्प लिया गया कि आगामी वर्षों में ऐसे और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि रतलाम जैसे शहर राष्ट्रीय एकता के आदर्श बन सकें।
Hemant Bhatt