धर्म संस्कृति : आपका व्यवहार अच्छा तो जीवन अच्छा 

धर्म संस्कृति : आपका व्यवहार अच्छा तो जीवन अच्छा 

महासती डॉ. संयमलता जी ने कहा

⚫ जीवन सादा और विचार उच्च होना चाहिए : महासती डॉ. कमलप्रज्ञा जी

नीलेश बाफना
रतलाम, 22 जुलाई । हमे सुबह उठते ही चाय-पानी, फिर धंधा-पानी उसके बाद याद आती है जिनवाणी । आगम में भी कहा गया है व्यवहार अच्छा तो जीवन अच्छा, हमें अपना जीवन ढंग से जीना है या ढोंग से जीना है। श्रावकाचार का प्रथम सोपान है अहिंसा, जियो और जीने दो,  बाहर से तो हम जीवों की रक्षा करते हैं चींटी को भी अभयदान देते हैं लेकिन हमारे मन में कितनी हिंसा भरी हुई है इस पर भी विचार मंथन आवश्यक है। आज के जमाने में अहिंसा की चोटी नहीं मिलती, तन ढकने के लिए लंगोटी नहीं मिलती। भगवान के लिए है मिठाई का ढेर लेकिन गरीबों को रोटी नहीं मिलती ।

यह विचार दक्षिण चन्द्रिका जैन दिवाकरीय महासती डॉ. संयमलता मसा ने नीमचौक जैन स्थानक पर आयोजित धर्मसभा मे कही।

व्यक्ति की पहचान शब्दों की शालीनता से

धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए डॉ. कमलप्रज्ञा जी म.सा. ने फरमाया की जीवन सादा और विचार उच्च होना चाहिए,  उम्र बढ़ती जा रही है लेकिन कपड़े छोटे होते जा रहे हैं व्यक्ति की पहचान व्यवहार से होती है शब्दों की शालीनता से होती है । आप सास हो या बहू, विद्यार्थी हो या शिक्षक, कर्मचारी हो या अधिकारी, व्यापारी हो या नौकर आपकी वाणी में मधुरता और व्यवहार में विनम्रता झलकनी चाहिए। चेहरे का रंग काला हो तो हीन भावना नहीं लाना, गोरा हो तो गुमान नहीं करना, हम अपने चेहरे का रंग नहीं बदल सकते लेकिन जीने का ढंग बजा सकते हैं।

इन सभी ने ताकत बनाया कमजोरी को

महासतिया जी ने फरमाया की सुकरात के चेहरे पर चेचक के दाग थे, गीतकार एवं संगीतकार रविंद्र जैन नेत्रहीन थे, इब्राहिम लिंकन साँवले थे। अबुल कलाम आजाद काले थे लेकिन इन सब ने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया। अपने आप को चेक करो कहीं आपकी खुशी हंसी में कुटिलता तो नही, आपके संवाद के पीछे विवाद तो नहीं है, अपने आप को बेहतरीन बनाने के लिए अपने गुणों का विकास करो। ऐसा हो हमारा व्यवहार जिससे जीवन में हो जाए चमत्कार।  तलवार की  पहचान उसकी धार से होती है व्यक्ति की पहचान व्यवहार से होती है।