धर्म संस्कृति : भारतीय संत परंपरा के शिखर महापुरुष स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी
⚫ विचारक एवं समाजसेवी कैलाश व्यास ने कहा
हरमुद्दा
रतलाम, 25 जून। समन्वय परिवार, रतलाम के तत्वावधान में पद्मभूषण, महामंडलेश्वर एवं भारत माता मंदिर के संस्थापक पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज की पुण्यतिथि पर स्थानीय समन्वय शिशु विहार, राजेंद्र नगर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ विचारक, वरिष्ठ समाजसेवी एवं अभिभाषक कैलाश व्यास तथा पूर्व महापौर शैलेन्द्र डागा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। प्रारंभ में समन्वय परिवार के माधव काकाणी ने प्रार्थना का पाठ कराया।
संकल्प का किया आजीवन पालन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कैलाश व्यास ने अपने उदबोधन में कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज भारतीय संत परंपरा के शिखर महापुरुष थे। उन्होंने संतत्व, सदाचार और सद्प्रेरणा को अपने मन, वचन और कर्म से साकार रूप प्रदान किया। बाल्यकाल से ही उनकी विलक्षण प्रतिभा एवं आध्यात्मिक चेतना के दर्शन उनके परिजन को होने लगा था। किशोरावस्था में उन्होंने माँ गंगा के समक्ष यह संकल्प लिया था कि वे अपने लिए कभी कुछ नहीं मांगेंगे, चाहे प्राण ही क्यों न चले जाएँ। उन्होंने इस संकल्प का आजीवन पालन किया।

कभी भी अमंगल नहीं हो सकता गुरु का सान्निध्य
गुरुभक्ति का एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए श्री व्यास ने बताया कि एक बार उनके गुरुदेव स्वामी वेदव्यासानंद जी उन्हें नदी तट पर गीता का पाठ करा रहे थे। अचानक गुरुदेव ने पूछा, “सत्यमित्र, क्या तुम सामने बह रही नदी में कूद सकते हो?” उन्होंने बिना किसी संकोच के ‘हाँ’ कहा। गुरुदेव की आज्ञा मिलते ही वे नदी में कूद पड़े, जबकि उन्हें तैरना नहीं आता था। जब वे डूबने लगे तो गुरुदेव ने स्वयं नदी में उतरकर उन्हें बाहर निकाला और पूछा, “जब तुम्हें तैरना नहीं आता था, तब तुम नदी में क्यों कूदे?” इस पर स्वामी सत्यमित्रानंद जी ने उत्तर दिया, “गुरु का आदेश ही ईश्वर का आदेश होता है। गुरु के सान्निध्य में कभी अमंगल नहीं हो सकता “
देश विदेश में प्रवाहित हुई सद विचारों की त्रिवेणी
श्री व्यास ने बताया कि वर्ष 2004 के उज्जैन सिंहस्थ महापर्व में स्वामीजी ने संकल्प लिया था कि वे नगर के समस्त सफाईकर्मियों के साथ क्षिप्रा स्नान करेंगे। उस समय वे गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और तेज बुखार से पीड़ित थे। चिकित्सकों द्वारा मना किए जाने के बावजूद उन्होंने कहा कि ये सभी सफाईकर्मी हमारे भाई-बहन हैं और उनके साथ स्नान करना मेरा कर्तव्य है। इस प्रकार स्वामीजी ने समन्वय, समता और सदविचारो की त्रिवेणी को देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में अत्यंत प्रामाणिकता के साथ प्रवाहित किया।
पूर्व महापौर ने सुनाएं कई संस्मरण
इस अवसर पर पूर्व महापौर शैलेन्द्र डागा ने स्वामीजी के अपने परिवार में आगमन तथा उनकी कृपा और आशीर्वाद से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
स्वर्गीय मुछाल को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में जावद के गुरुभक्त स्वर्गीय भगवानदास मूँछाल को भी दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
यह थे मौजूद
सभा में समन्वय परिवार के अध्यक्ष अशोक आप्टे, शिवराम शर्मा, जितेन्द्रसिंह वाघेला, लल्लनसिंह ठाकुर, सुनील लाठी मुकेश शुक्ला, दयारामभाई हेमन्त चोरमा, कैलाश छाबड़ा, श्याम पंडित, प्रशांत व्यास सहित अनेक श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित थे। संचालन माधव काकाणी ने किया।
Hemant Bhatt