जनसुनवाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव: रतलाम कलेक्टर ने किया योजना का विकेंद्रीकरण

जनसुनवाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव: रतलाम कलेक्टर ने किया योजना का विकेंद्रीकरण

अब स्थानीय स्तर पर होगा शिकायतों का समाधान

केंद्रीकरण से विकेंद्रीकरण तक: समीक्षात्मक परिदृश्य

प्रशासनिक प्रक्रिया का दोहराव

⚫ 'जनविश्वास' की तर्ज पर मजबूत होगा संवाद

हरमुद्दा
​रतलाम, 11 अगस्त। आम नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं और शिकायतों के निराकरण के लिए अब जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अजय कटेसरिया ने जिले की जनसुनवाई व्यवस्था की गहन समीक्षा के बाद इसमें एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। रतलाम में अब तक चली आ रही केंद्रीकृत व्यवस्था को समाप्त कर जनसुनवाई का विकेंद्रीकरण कर दिया गया है।

कलेक्टर अजय कटेसरिया

अब प्रत्येक मंगलवार को प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक जिले के सभी जिला स्तरीय, अनुविभागीय (SDM), तहसील, विकासखण्ड, जनपद पंचायत, नगरीय निकाय एवं अन्य शासकीय कार्यालयों में स्थानीय स्तर पर ही जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।

केंद्रीकरण से विकेंद्रीकरण तक: समीक्षात्मक परिदृश्य

उल्लेखनीय है कि जुलाई 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में जनसुनवाई का प्रकल्प प्रारंभ किया था। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि निचले स्तर के विभागीय अधिकारियों की अनदेखी, कार्यप्रणाली की कमियों और भ्रष्टाचार की शिकायतें सीधे कलेक्टर तक पहुँच सकें। इस सोच के तहत व्यवस्था का केंद्रीकरण किया गया था ताकि कलेक्टर को सीधे मैदानी कमियों की जानकारी मिले। हालांकि, रतलाम जिले में लंबे समय से चली आ रही इस केंद्रीकृत व्यवस्था की समीक्षा करने पर एक नया व्यावहारिक पहलू सामने आया।

समय और धन का अपव्यय

दूरस्थ ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों, विशेषकर किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगों को लंबी दूरी तय करके जिला मुख्यालय आना पड़ता था।

प्रशासनिक प्रक्रिया का दोहराव

जिला मुख्यालय पर प्राप्त होने वाले अधिकांश आवेदन अंततः निराकरण के लिए उन्हीं निचले मैदानी कार्यालयों (तहसील, जनपद, पंचायत आदि) को वापस भेजे जाते थे, जहाँ से आवेदक आया था।

संसाधनों का असंतुलन

पहले नागरिक को जिला मुख्यालय बुलाकर आवेदन लेना और फिर उसी आवेदन को वापस संबंधित निचले कार्यालय भेजना नागरिक और प्रशासन दोनों के समय व संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग नहीं था। इसी समीक्षा के आधार पर कलेक्टर कटेसरिया ने इस योजना का स्वरूप बदलते हुए इसे विकेंद्रीकृत करने का निर्णय लिया है, ताकि समस्याओं का समाधान आवेदक के निकटतम कार्यालय में ही हो सके।

नई विकेंद्रीकृत व्यवस्था

पारदर्शी प्रक्रिया: प्रत्येक कार्यालय के सूचना-पटल पर "जनसुनवाई – प्रत्येक मंगलवार, प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक" स्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा।
​पंजीयन एवं पावती: जनसुनवाई में आने वाले प्रत्येक आवेदन का रजिस्टर में पंजीयन कर आवेदक को अनिवार्य रूप से पावती दी जाएगी।
​स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान: जो मामले संबंधित अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में हैं, उनका निराकरण वहीं किया जाएगा। बेवजह आवेदनों को जिला मुख्यालय नहीं टला जाएगा।
​विशेष मामले ही जाएँगे कलेक्टर के पास: केवल वही प्रकरण जिला कार्यालय भेजे जाएँगे जिनमें अंतर्विभागीय समन्वय, नीतिगत मार्गदर्शन या सीधे कलेक्टर के हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी।

​'जनविश्वास' की तर्ज पर मजबूत होगा संवाद

वर्तमान में राज्य शासन द्वारा संचालित 'जनविश्वास' कार्यक्रम के तहत हर शुक्रवार अधिकारी मैदानी क्षेत्रों में जाकर नागरिकों से सीधा संवाद कर रहे हैं। इसी भावना के अनुरूप मंगलवार की विकेंद्रीकृत जनसुनवाई से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होगी तथा शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण संभव हो सकेगा।