सामाजिक सरोकार : भारतीय संस्कृति में विवाह एक पावन संस्कार

सामाजिक सरोकार : भारतीय संस्कृति में विवाह एक पावन संस्कार

महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानन्द सरस्वती ने कहा

हरमुद्दा
रतलाम, 11 दिसंबर। गृहस्थाश्रम भारतीय संस्कृति में पूज्य, पावन एवं सहजता की संवाहक अमृत धारा है। अनेक ऋषि, मुनि, महापुरुष और भगवान भी जब पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब वे इसी आश्रम के माध्यम से प्रकट हुए। विवाह भोग का साधन नहीं है। इसमें नैतिकता, निष्टा और  सह-अस्तित्व की भावना सर्वोपरी है।

यह विचार केशव पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानन्दजी सरस्वती ने स्थानीय श्री कालिका माता परिसर स्थित श्रीमती गायत्री विश्वजीत टण्डन के निवास स्थान पर आयोजित सत्संग सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। 

स्वामी जी का किया स्वागत

प्रारंभ में स्वामीजी का स्वागत मोहनलाल भट्ट,  कैलाश व्यास, राकेश पोरवाल, शिवराम शर्मा, के. बी. व्यास, रमेशचंद्र शर्मा , सतीश झंवर, रथिन व्यास, अजय चौहान,  जया शर्मा आदि भक्तजन ने किया। इस अवसर स्वामीजी ने नवदंपति सुरभि-यश टण्डन सहित उपस्थित नागरिकों को  शुभाशीष प्रदान किया।