सामाजिक सरोकार : बुजुर्ग को थी देहदान की इच्छा, मगर नहीं मान रहे थे परिजन, अब है खुश हो गई अभिलाषा पूरी

सामाजिक सरोकार : बुजुर्ग को थी देहदान की इच्छा, मगर नहीं मान रहे थे परिजन, अब है खुश हो गई अभिलाषा पूरी

समाजसेवी श्री काकानी ने परिजनों को दी समझाइश

⚫ कोरोना में पोती वैष्णवी खो चुकी अपने पिता को

हरमुद्दा
रतलाम, 22 अगस्त। बुजुर्ग को देहदान करने की प्रबल इच्छा थी मगर परिजन उनके इस संकल्प से सरोकार नहीं रख रहे थे। अंततोगत्वा समाजसेवी एवं शतक वीर रक्तदानी गोविंद काकानी परिजनों से मिले। उन्होंने समझाया परिजन माने और बुजुर्ग की अभिलाषा पूरी हो गई। देहदान के लिए संकल्प पत्र भरवारा गया।

यहां बात हो रही है तेजा नगर निवासी 78 वर्षीय बसंती लाल पिता गोपाल सिंह चौहान की। श्री चौहान की देहदान करने की तीव्र इच्छा थी। श्री चौहान ने अपने तई प्रयास से संकल्प  पूरा करने के लिए स्वयं ने घरवालों को मनाने की बहुत कोशिश की परंतु परिजन नहीं माने। श्री चौहान ने काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन सचिव गोविंद काकानी से घरवालों को मनाने के लिए आग्रह किया। 

नाराजगी व्यक्त करने वाली पोती को समझाया, तब माने परिजन

समाजसेवी श्री काकानी, श्री चौहान के तेजा नगर निवास पर शाम को संकल्प पत्र भरने के लिए पहुंचे। पोती वैष्णवी चौहान ने स्पष्ट नाराजी व्यक्त करते हुए मना कर दिया। समाजसेवी काकानी ने उपस्थित सभी घरवालों को देहदान की जानकारी देना शुरू की। बताया कि आप सभी धार्मिक क्रियाएं कर सकते हैं। सिर्फ शव को अग्नि को समर्पित करने की जगह मेडिकल कॉलेज को विद्यार्थी अध्ययन के लिए दिया जाता है। शव को जलाने से लाखों लीटर ऑक्सीजन वायुमंडल में समाप्त होती है। प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। 

कोरोना में वैष्णवी खो चुकी अपने पिता को

कोरोना की महामारी को हमने आंखों से देखा है। जैसे ही यह बात काकानी ने कहीं तो वैष्णवी को उसके पिता की कोरोना में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मृत्यु वाला दृश्य आंखों में तैर गया। उसने बताया कि मेरे पिताजी  स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह चौहान के कोरोना बीमारी के समय आशीष पंडित के सहयोग से आपको बुलाया और आपने भी कोशिश की थी परंतु अप्रैल 2021 में बचाया नहीं जा सका था। 

दिया अनुकरणीय संदेश

देहदान कि उक्त चर्चा के बाद वैष्णवी ने स्वयं के साथ परिवारजनों की देहदान के लिए स्वीकृति प्रदान करते हुए आम जनों के लिए अनुकरणीय संदेश दिया। बंसीलाल चौहान के सुपुत्र जितेंद्र सिंह चौहान, महेंद्र सिंह चौहान एवं उपस्थित मातृशक्ति ने सहमति दी। संकल्प पत्र को डॉक्टर लक्ष्मी नारायण पांडेय मेडिकल कॉलेज के शरीर संरचना विभाग में जमा किया जाएगा। 

देहदान से परिवार व समाज को लाभ

श्री काकानी ने बताया कि देहदान से मेडिकल विद्यार्थियों को शरीर संरचना का प्रत्यक्ष ज्ञान मिलता है। नेत्र व त्वचा दान से रोगियों को जीवन मिलता है। अंतिम संस्कार की लागत, लकड़ी की खपत और प्रदूषण कम होता है। साथ ही शासन द्वारा देहदानी परिवार को सामाजिक सम्मान व प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाते हैं। देहदान के लिए श्री काकानी से मोबाइल नम्बर 9329310044 पर संपर्क कर सकते हैं।