मामला डीपी ज्वेलर्स द्वारा सनातन धर्म के अपमान का, न्यायालय ने पुलिस को दिए जांच के निर्देश
⚫ मानस की चौपाई का किया दुरुपयोग, सनातन धर्मावलंबियों की भावना को किया आहत
⚫ कोर्ट में दायर हुआ निजी परिवाद
⚫ कोर्ट ने पुलिस से जांच प्रतिवेदन मांगा 23 जनवरी तक
हरमुद्दा
रतलाम,19 जनवरी। डीपी ज्वेलर्स द्वारा कंपनी के विज्ञापन में सनातन धर्मावलम्बियों की भावनाओं को आहत करने का मामला फिर गरमाया है। डीपी ज्वेलर्स ने अपने विज्ञापन में मानस की चौपाई का दुरुपयोग किया है। सनातन धर्मावलंबियों की भावना आहत हुई इस मामले में न्यायालय ने पुलिस को जांच कर 23 जनवरी तक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।
एडवोकेट प्रदीप सक्सेना ने बताया कि डीपी ज्वेलर्स ने रतलाम में अपने नए शो रूम का प्रचार करने के लिए प्रकाशित एक विज्ञापन में राम चरित मानस की प्रसिद्ध चौपाई रघुकुल रीत सदा चली आई का दुरुपयोग किया था। डीपी ज्वेलर्स के निदेशकों ने इस चौपाई की दूसरी पंक्ति को बदल कर अपने विज्ञापन के रुप में उपयोग किया था,जिससे सनातन धर्मावलम्बियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई।
किया था इस कृत्य की नाराजगी पर प्रदर्शन
उल्लेखनीय है कि डीपी ज्वेलर्स का यह कारनामा सोशल मीडिया पर भी काफी छाया रहा था। सोशल मीडीया पर हजारों सनातन धर्मावलम्बियों ने डीपी ज्वेलर्स के इस कृत्य पर नाराजगी का प्रदर्शन किया था।
मालवीय ने करवाया न्यायालय में वाद प्रस्तुत
डीपी ज्वेलर्स के इसी विज्ञापन से आक्रोशित एक सनातनी शांतिलाल मालवीय ने माणकचौक पुलिस डीपी ज्वेलर्स के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया था,परन्तु माणकचौक पुलिस ने श्री मालवीय की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद श्री मालवीय ने अपने अभिभाषक प्रदीप सक्सेना के माध्यम से न्यायालय में निजी परिवाद प्रस्तुत किया।
चौपाई को किया बिगाड़ कर प्रस्तुत
एडवोकेट श्री सक्सेना ने बताया कि डीपी ज्वेलर्स के निदेशकों ने अपने नए शो रूम के उद्घाटन के मौके पर एन दशहरे के दिन 03 अक्टूबर को अपने विज्ञापन में रामचरित मानस की प्रसिद्ध चौपाई को बिगाडकर "रघुकुल रीत सदा चली आई, स्वर्ण से हमेशा सुख समृद्धि घर आई" कर दिया था। जबकि रामचरित मानस की वास्तविक चौपाई "रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन ना जाई" है। चौपाई बिगाड़कर इसके विज्ञापनों के बड़े बड़े होर्डिंग लगाए लगाए गए। यही विज्ञापन अखबारों में भी प्रकाशित करवाए गए। विज्ञापन में रामतरित मानस की चौपाई का इस तरह व्यवसायीकरण करने से सनातन धर्मावलम्बियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई।
विज्ञापन में विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य
एडवोकेट सक्सेना के मुताबिक डीपी ज्वेलर्स के निदेशकों द्वारा अपने व्यावसायिक विज्ञापन में विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य, जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से दुष्कृत्य किया है। इसके साथ ही किसी व्यक्ति या सनातन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पंहुचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)की धारा 299 एवं धारा 302 के तहत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
23 जनवरी तक पुलिस को देना है जांच प्रतिवेदन न्यायालय में
एडवोकेट सक्सेना ने बताया कि जब उनके पक्षकार द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की, तब व्यथित होकर उनके पक्षकार ने न्यायालय में डीपी ज्वेलर्स के विरुद्ध निजी परिवाद प्रस्तुत किया। डीपी ज्वेलर्स के समस्त निदेशकों के विरुद्ध जिला न्यायालय की न्यायिक दण्डाधिकारी कनिष्ठ खण्ड सुश्री वैशाली चौहान के न्यायालय में प्रस्तुत इस निजी परिवाद पर न्यायालय ने पुलिस थाना माणक चौक को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने पुलिस को अपना जांच प्रतिवेदन 23 जनवरी को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
फिर होगी अगली सुनवाई
एडवोकेट श्री सक्सेना के अनुसार पुलिस द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद न्यायालय द्वारा निजी परिवाद की अगली सुनवाई की जाएगी।
Hemant Bhatt