धर्म संस्कृति : विश्व शांति दूत एवं समर्पण के शिखर थे प्रजापिता ब्रह्मा बाबा
⚫ प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की पुण्यतिथि मनाई विश्व शांति दिवस के रूप में
हरमुद्दा
रतलाम, 18 जनवरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के डोंगरे नगर स्थित दिव्य दर्शन भवन सेवा केंद्र पर 18 जनवरी को ब्रह्मा कुमारीज संस्था के संस्थापक पिता श्री ब्रह्मा बाबा की पुण्यतिथि को विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया गया। सभी भाई बहनों द्वारा प्रातः 8:00 बजे से 12:00 तक राजयोग के अभ्यास द्वारा समग्र विश्व में शांति का प्रकंपन फैलाया गया।

इस अवसर पर रतलाम सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी आयुर्वैदिक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर दिलीप नलगे, लोक अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय, समाजसेवी राजेंद्र पोरवाल, ब्रह्माकुमारी गीता दीदी एवं कन्हैया लाल मेहता द्वारा पुष्पांजलि अर्पित किया गया।
आत्मविश्वास से चैतन्य देवों को गढ़ा
रतलाम सेवा केंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने ब्रह्मा बाबा के जीवन चरित्र के बारे में बताते हुए कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्थापक पिता श्री ब्रह्मा बाबा 1936 से परमपिता शिव परमात्मा के साकार माध्यम बन विश्व शांति एवं मानव कल्याण के प्रति महान कार्य करते हुए 18 जनवरी 1969 को संपूर्णता को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि मानवता के उस मसीहे ने अरावली की शांत वादियों में, दुनिया की बहती धार के बिल्कुल उलट जाकर, अरावली की तरह अडिग आत्म-विश्वास के साथ जिस तरह चैतन्य देवों की गढ़ा है वह आश्चर्यजनक है। उनके एक छोटे से महावाक्य ने भी पूरे जीवन की दिशा दे डाली। उनका एक छोटा-सा स्पर्श पूरे जीवन का प्रेम-संबल बन गया, उनकी एक मधुर मुस्कान ने जीवनभर के संताप हर लिए।वाह! प्रजापिता ब्रह्मा वाह ! तेरे कदमों के स्पर्श से आबू का कण-कण रत्न-मोती, शांति-मोती और प्रेम-मोती हो गया, जिन्हें समेटने आज विश्व भर की भीड़ उमड़ती आ रही है।
जगत को भी दिया सहारा
डॉक्टर दिलीप नलगे ने कहा कि कलि के इस विकराल काल में भी अनेक महान विभूतियों ने समय-समय पर वसुंधरा के आंचल को सुशोभित किया परंतु उनके चले जाने के बाद पुनः धरती मां की कोख सूनी हो गई कुछ ही महान पुरुष ऐसे हुए जो इस जनानी को अपना महान उत्तराधिकारी दे सके उनमें सर्व महान हुए नवयुग के श्रेष्ठ प्रजापिता ब्रह्मा जिन्होंने जगत को सहारा भी दिया और धीरज भी बनाया और अनेक महान वत्स उनके आंगन को प्रफुल्लित करने वाले प्रदान किया जो की साकार में मानो उनके ही रूप है किसी भी महान व्यक्ति की महानता इसी बात से आंकी जाती है कि यह कितने महान पुरुषों का निर्माण करता है।
अंतर्मुखी बनने का है जनवरी
ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा के जीवन में निरहंकारिता एवं निर्विकारिता सदैव झलकती थी उन्होंने स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन का उदाहरण पूरे विश्व के सामने प्रस्तुत किया अतः जनवरी मास हम सभी के लिए अंतर्मुखी बनने का समय होता है यह कुछ प्रेरणाय लेकर आता है और वरदान देकर चला जाता है।
भाई बहनों को भेंट किए वरदान कार्ड
समस्त भाई बहनों ने आदि पिता ब्रह्मा बाबा को सच्ची-सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर ब्रह्मा बाबा सामान त्याग तपस्या के स्वरूप बनने का दृढ़ संकल्प किया। कार्यक्रम के पश्चात सभी भाई बहनों को भोग एवं वरदान कार्ड दिए गए।
Hemant Bhatt