श्रद्धांजलि : समाजवादी विचारों से प्रेरित पूर्व पार्षद डोशी का निधन, दी श्रद्धांजलि

उन दिनों की राजनीति में जनता पार्टी की मजबूती के लिए और अन्य मुद्दों पर विनय डोशी, चंद्रशेखर, शरद यादव जैसे बड़े राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर नेताओं को पत्र भी लिखते थे। भिन्न भिन्न मुद्दों पर डोशी द्वारा लिखित पत्रों के बाकायदा ये राष्ट्रीय नेता उत्तर भी दिया करते थे।

श्रद्धांजलि : समाजवादी विचारों से प्रेरित पूर्व पार्षद डोशी का निधन, दी श्रद्धांजलि

सैलाना नगर पालिका एवं कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष गंभीरमल दोशी के थे पुत्र

हरमुद्दा
रतलाम/सैलाना, 25 नवंबर। सैलाना नगर पालिका और कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेसी नेता स्वर्गीय गंभीरमल डोशी के पुत्र वरिष्ठ अभिभाषक विनय डोशी का उनके रतलाम स्थित निवास पर निधन हो गया। अंतिम यात्रा में काफी लोग शामिल हुए। श्रद्धांजलि अर्पित की।

समाजवादी विचारों से प्रेरित विनय डोशी 1983 से 1988 तक जनता पार्टी से सैलाना नगर पालिका के पार्षद भी रहे। बाद में वकालत में सक्रिय हो गए और न्यायालयीन कार्यों की वजह से रतलाम शिफ्ट हो गए। वर्तमान में वे रतलाम में कस्तूरबा नगर में निवासरत थे।

समाजवादी थे वे

आदिवासी अंचल में भगवान माने जाने वाले पूर्व राज्यसभा सदस्य मामा बालेश्वर दयाल के साथ भी उन्होंने काम किया। उन्हीं के विचारों से प्रेरित हो कर जनता पार्टी से डोशी ने 1983 में सैलाना नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 8 से पार्षद चुनाव लड़ा और जीते। तब पूरे मध्य प्रदेश में वे जनता पार्टी के इकलौते पार्षद थे। परिवार के उनके पिता सहित सभी लोग कांग्रेसी विचारधारा के थे पर विनय डोशी ने समाजवादी हो कर अपना अलग राजनैतिक वजूद बनाए रखा। सैलाना नगर पालिका में भी उन्होंने जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस का मुखर विरोध किया।

सक्रियता के चलते प्रदेश स्तर का पद मिला

विनय डोशी की समाजवादी राजनीति में सक्रियता के चलते उन्हें प्रदेश जनता पार्टी का महासचिव भी अस्सी के दशक में बनाया गया था। तब जनता पार्टी के अध्यक्ष देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हुआ करते थे।

चंद्रशेखर से उनका पत्र व्यवहार भी था

उन दिनों की राजनीति में जनता पार्टी की मजबूती के लिए और अन्य मुद्दों पर विनय डोशी, चंद्रशेखर, शरद यादव जैसे बड़े राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर नेताओं को पत्र भी लिखते थे। भिन्न भिन्न मुद्दों पर डोशी द्वारा लिखित पत्रों के बाकायदा ये राष्ट्रीय नेता उत्तर भी दिया करते थे।

धीरे धीरे राजनीतिक सक्रियता हुई कम

बाद के वर्षों में क्षेत्र के 73 वर्षीय इस कद्दावर नेता की राजनीतिक सक्रियता कम होने लगी। अपनी वकालत और पारिवारिक कारणों से वे राजनीति से दूर होने लगे। बीते कुछ वर्षों से बीमारी के चलते वे घर पर ही स्वास्थ्य लाभ लेते रहे। गत एक दशक से उनका धार्मिक रुझान भी बढ़ने लगा।वे धार्मिक मामलों में अग्रणी रहने लगे। जैन साधु संतों के सान्निध्य में धर्म ध्यान में उनका ज्यादा समय व्यतीत होने लगा। सोमवार देर रात उन्होंने रतलाम के कस्तूरबा नगर स्थित निवास पर अंतिम सांस ली।

शोक की लहर

मंगलवार अल सुबह जब विनय डोशी के निधन की खबर सैलाना, रतलाम में फैली तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।सैलाना से भी बड़ी संख्या में लोग उनके रतलाम स्थित निवास पर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की।

अंतिम यात्रा में शामिल होकर दी श्रद्धांजलि

उनकी अन्तिम यात्रा में सुनील ललवानी, कांतिलाल संघवी, मणिलाल जी, विजय पटवा, संजय पोरवाल, अनिल कटारिया,राजेश धाकड़,राजेंद्र शुक्ला, जय छजलानी, आदि ने सम्मिलित हो कर श्रद्धांजलि दी। जवाहर नगर मुक्तिधाम पर उनके दोनों पुत्रों रितेश और सुमंत ने मुखाग्नि दी।