जिम्मेदारों पर कार्रवाई : समयसीमा लांघने वाले तीन राजस्व अधिकारियों ठाकुर, जैन और मोरे पर गिरी गाज, लगा ₹9,250 का जुर्माना
⚫ 37 मामलों में तय वक्त पर नहीं दी सेवाएं
⚫ आवेदकों को कराया परेशान
⚫ अपर कलेक्टर का कड़ा रुख
⚫ जावरा तहसीलदार और दो नायब तहसीलदारों की जेब पर पड़ी मार
हरमुद्दा
रतलाम, 9 जुलाई। सुशासन और लोक सेवा गारंटी के दावों की हवा निकालने वाले जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल ही गया। आम जनता को चक्कर कटवाने और समय पर काम न करने को अपनी कार्यशैली बना चुके तीन राजस्व अधिकारियों को अपनी सुस्ती की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। दो नायब तहसीलदार भगवान सिंह ठाकुर और वैभव जैन तथा तहसीलदार सहदेव मोरे पर अर्थ दंड लगाया है।।

एडीएम बृजेंद्र कुमार रावत
मध्य प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010 के तहत समयसीमा में सेवाएं न देने के गंभीर मामले में अपर कलेक्टर बृजेंद्र कुमार रावत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन राजस्व अधिकारियों पर कुल 9,250 रुपए का अर्थदंड (जुर्माना) ठोंक दिया है।
फाइलों में दफन रहा जनता का हक
प्रशासनिक समीक्षा में यह कड़वा सच सामने आया है कि न्यायालय नायब तहसीलदार जावरा, न्यायालय नायब तहसीलदार टप्पा ढोढ़र और खुद तहसीलदार जावरा के कार्यालयों में जनता के आवेदन सिर्फ धूल खाते रहे। कुल 37 ऐसे मामले पाए गए, जो तय समयसीमा के पार हो चुके थे। यह लापरवाही सिर्फ फाइलों की देरी नहीं है, बल्कि उस अधिनियम का सीधा उल्लंघन है जिसे जनता को समय पर हक दिलाने के लिए बनाया गया था। समय पर निराकरण न होने से दर्जनों आवेदकों को मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ी।
जानिए किस अधिकारी की लापरवाही पर कितना लगा दंड
लापरवाही की इस लिस्ट में जावरा और ढोढ़र के राजस्व अधिकारी शामिल हैं। अधिनियम की धारा 7(1)(क) के तहत की गई इस दंडात्मक कार्रवाई इन पर हुई।
⚫ नायब तहसीलदार जावरा भगवानसिंह ठाकुर पर 17 लंबित प्रकरणों के लिए 4,250 रुपए।
⚫ नायब तहसीलदार टप्पा ढोढ़र वैभव जैन पर 12 लंबित प्रकरणों के लिए 3,000 रुपए
⚫ तहसीलदार जावरा सहदेव मोरे पर 8 लंबित प्रकरणों के लिए 2,000 रुपये का अर्थदण्ड लगाया गया है।
...तो सुधरेगी व्यवस्था?
राजस्व विभागों में समय पर काम न होना और आवेदकों को परेशान करना एक आम शिकायत बन चुका है। अपर कलेक्टर द्वारा की गई यह कार्रवाई उन सभी बाबुओं और अफसरों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी कुर्सियों पर बैठकर जनता के वक्त की कीमत नहीं समझते। अब देखना यह है कि इस जुर्माने के बाद जावरा और ढोढ़र के इन दफ्तरों में फाइलों की कछुआ चाल में कुछ सुधार आता है या फिर जनता को अपने कामों के लिए यूं ही भटकना पड़ेगा।
Hemant Bhatt