ममता शर्मसार: 4 माह के मासूमों की कातिल मां को दोहरा आजीवन कारावास
⚫ साक्ष्य छुपाने वाले पति को भी जेल
हरमुद्दा
रतलाम, 31 जुलाई। एक मां, जिसे दुनिया में ममता और सुरक्षा का सबसे बड़ा आंचल माना जाता है, जब वही अपने ही जन्मे चार महीने के बेकसूर जुड़वा बच्चों की कातिल बन जाए, तो समाज और मानवीय संवेदनाएं सन्न रह जाती हैं। रतलाम के माणक चौक थाना क्षेत्र में घटी इस खौफनाक वारदात ने न केवल रिश्तों की पवित्रता को तार-तार किया, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्षणिक आक्रोश में कोई मां किस हद तक गिर सकती है।
अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया के न्यायालय ने इस जघन्य हत्याकांड पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी मां पम्मी उर्फ मुस्कान को दोहरे आजीवन कारावास और 10,000 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, घटना को छिपाने और पुलिस को बिना सूचना दिए शवों को दफनाने के जुर्म में पति आमिर को 3-3 वर्ष के कारावास व 2000 रुपये जुर्माने से दंडित किया है। पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने की।

क्रूरता का खौफनाक घटनाक्रम
अतिरिक्त लोक अभियोजक श्री चौहान ने हरमुद्दा को बताया कि घटना 19-20 नवंबर 2024 की है। वेद व्यास कॉलोनी में रहने वाली मुस्कान का अपने पति आमिर से इस बात पर विवाद हुआ था कि वह रिश्तेदारी में गमी होने पर बाहर न जाए। मुस्कान का कहना था कि वह अकेले दो जुड़वा बच्चों (हसन और फातिमा) को नहीं संभाल सकती। जब पति और सास उसकी बात न मानकर चले गए, तो आक्रोश और चिढ़ में अंधी हुई मुस्कान ने ममता का घोंट दिया।
दे दी झूठी खबर
उसने सोचा कि "बच्चों को ही खत्म कर देती हूं, तो रोज-रोज की समस्या ही खत्म हो जाएगी।" इसके बाद उसने बारी-बारी से अपने दोनों 4 माह के मासूम बच्चों को पानी की सिंटेक्स की टंकी में डुबोकर बेरहमी से मार डाला। हत्या के बाद आरोपी महिला ने खुद को बेकसूर दिखाने का नाटक किया और पति को फोन कर झूठी खबर दी कि बच्चे मिल नहीं रहे हैं।
पुलिस को गुमराह करने और साक्ष्य छुपाने की नापाक कोशिश
पति आमिर और उसके दोस्त बिलाल ने जब घर आकर तलाशी ली, तो दोनों बच्चे पानी की टंकी में पड़े मिले। बच्चों के मुंह से पानी निकल रहा था और उनकी मौत हो चुकी थी।
कानूनन इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी जानी चाहिए थी, लेकिन पति आमिर ने पुलिस से सच्चाई छिपाते हुए दोनों मासूमों के शवों को शैरानी पुरा स्थित कब्रिस्तान में दफना दिया। बाद में सूचनाकर्ता इरशाद कुरैशी की सूचना पर पुलिस ने जांच शुरू की। तहसीलदार की मौजूदगी में शवों को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें डूबने से मौत की पुष्टि हुई।
गवाहों के पलटने के बावजूद कानून के शिकंजे से नहीं बच पाई कातिल मां
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह आई कि प्रस्तुत किए गए 24 गवाहों में से 16 साक्षी पक्ष विरोधी हो गए। इसके बावजूद, पुलिस द्वारा जुटाए गए मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय में अपराध सिद्ध किया गया। न्यायालय ने माना कि एक मां द्वारा अपने ही आश्रित और असहाय मासूमों की इस तरह नृशंस हत्या करना अक्षम्य है।
मुद्दे की बात

समाज के चेहरे पर तमाचा
यह घटना केवल एक कानूनी मामला भर नहीं है, बल्कि उस गिरते नैतिक स्तर की बानगी है जहां एक महिला का गुस्सा और चिढ़ उसकी ममता पर भारी पड़ गया। जिन हाथों को बच्चों को झूला झुलाना था, उन्हीं हाथों ने उन्हें पानी की टंकी में डुबो दिया। न्यायालय का यह फैसला समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून की नजरों से साक्ष्य छुपाने या गवाहों को मोड़ने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी—पाप का अंत सलाखों के पीछे ही होगा।
Hemant Bhatt