धर्म संस्कृति : रतलाम में 22 वर्षों बाद सामाजिक समरसता का महासंगम, चातुर्मास का दुर्लभ सौभाग्य
⚫ महर्षि वाल्मीकि सनातन धर्मसभा ने किया भव्य अभिनंदन
⚫ स्वामी विशोकानन्द भारतीजी महाराज की भव्य शोभायात्रा का आत्मीय स्वागत
हरमुद्दा
रतलाम, 31 जुलाई। धर्मनगरी रतलाम में भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। शुक्रवार को निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर एवं बीकानेर राजगुरु श्री श्री 1008 स्वामी विशोकानन्द भारतीजी महाराज की शहर में अत्यंत भव्य और अलौकिक शोभायात्रा निकाली गई। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर एवं जयघोष के साथ दिव्य विभूतियों का स्वागत किया, जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो उठा।

22 वर्षों बाद रतलाम को मिला चातुर्मास का दुर्लभ सौभाग्य
संस्था अध्यक्ष पं. शिवपाल छप्री ने हरमुद्दा बताया कि रतलाम शहर को पूरे 22 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह अत्यंत दिव्य और मांगलिक शुभ अवसर प्राप्त हुआ है। सनातन धर्म के इस चातुर्मास के माध्यम से शहर के सभी आस्थावान और श्रद्धावान परिजनों को सामाजिक समरसता के साथ आध्यात्मिक ज्ञानगंगा में स्नान करने का अवसर मिलेगा।
महर्षि वाल्मीकि सनातन धर्मसभा ने किया भव्य अभिनंदन

शोभायात्रा के शहर सराय (सेवा मंडल के सामने) पहुंचने पर महर्षि वाल्मीकि सनातन धर्मसभा, रतलाम द्वारा भव्य मंच बनाकर संत-महात्माओं एवं दिव्य विभूतियों का आत्मीय वंदन, अभिनंदन और स्वागत संस्था के अध्यक्ष पं. शिवपाल छप्री, समिति संयोजक कमलभाटी वाल्मीकि, वरिष्ठ सदस्य अशोक हाडे, सुरेन्द्र आर्य, विजय भाटी, श्याम छप्री, मुकेश खरे, रोहित भाटी, राजू कल्याणे, लेखराज भाटी एवं मातृशक्ति जयश्री देवहंस सहित अनेक गणमान्यजनों ने महाराजश्री की अगवानी कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले मुख्य धार्मिक अनुष्ठान
⚫ प्रातः स्वाध्याय: प्रतिदिन प्रातः 09:00 बजे से 10:00 बजे तक (कठोपनिषद पर स्वाध्याय)।
⚫ सायंकालीन कथा: प्रतिदिन सायं 04:00 बजे से 06:00 बजे तक (श्रीमद् भागवत कथा एवं द्विमास परायण)।
⚫ चातुर्मास पूर्णाहुति: 26 सितंबर 2026 को महाहवन के साथ पूर्णाहुति होगी।
धर्मप्रेमी जनता से पुण्य लाभ की अपील
महर्षि वाल्मीकि सनातन धर्मसभा रतलाम ने शहर के सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से विनम्र अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस ज्ञानगंगा का लाभ उठाएं, संतों का सान्निध्य प्राप्त करें और अपने जीवन को धन्य बनाकर पुण्य संचित करें।
Hemant Bhatt