उपलब्धि सरोकार : गांव बनबनी की बेटी प्रेमलता ने रचा सफलता का इतिहास

सरकारी स्कूल से पढ़ाई, B.Sc. के बाद M.Sc. करते हुए NEET की तैयारी शुरू की; दूसरे वर्ष अभ्यास से जुड़ी और एक साल की मेहनत में हासिल किया मेडिकल कॉलेज में प्रवेश

उपलब्धि सरोकार : गांव बनबनी की बेटी प्रेमलता ने रचा सफलता का इतिहास

GMC भोपाल में MBBS में लिया प्रवेश

सरकारी स्कूल से पढ़ाई, B.Sc. के बाद M.Sc. करते हुए NEET की तैयारी शुरू की

⚫ दूसरे वर्ष अभ्यास से जुड़ी और एक साल की मेहनत में हासिल किया मेडिकल कॉलेज में प्रवेश

हरमुद्दा
रतलाम, 12 सितंबर। शहर के समीप स्थित छोटे से गांव बनबनी की बेटी प्रेमलता ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर सफलता की मिसाल पेश की है। प्रेमलता ने NEET-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए GMC भोपाल में MBBS में प्रवेश हासिल किया है।


प्रेमलता के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर रही है। माता-पिता आर्थिक कठिनाइयों से जूझते हुए भी अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। प्रेमलता की प्रारंभिक पढ़ाई गांव के शासकीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने कामठाना के शासकीय विद्यालय से आगे की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने शुरू से ही शासकीय विद्यालय में पढ़ाई की।

12वीं के बाद B.Sc. और फिर M.Sc. करते हुए NEET की तैयारी

प्रेमलता ने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद B.Sc. में प्रवेश लिया और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने M.Sc. में प्रवेश लिया। प्रेमलता बताती हैं कि 12वीं तक उन्हें यह जानकारी भी नहीं थी कि डॉक्टर बनने के लिए किस प्रकार की पढ़ाई और परीक्षा की आवश्यकता होती है। जब वह आगे की पढ़ाई के लिए रतलाम आईं, तब उन्हें पता चला कि NEET के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बना जा सकता है। यहीं से उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना जन्मा।
M.Sc. के प्रथम वर्ष में पढ़ाई करते हुए ही उन्होंने पहली बार NEET की परीक्षा दी। उस समय उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करते हुए परीक्षा दी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्हें समझ आया कि NEET जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही रणनीति और अनुभवी मार्गदर्शन भी जरूरी है।

M.Sc. के दूसरे वर्ष में अभ्यास से जुड़ीं

NEET में बेहतर तैयारी के लिए प्रेमलता को एक परिचित के माध्यम से रतलाम के अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद M.Sc. के दूसरे वर्ष में पढ़ाई करते हुए उन्होंने अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट ज्वाइन किया।
अभ्यास में आने के बाद उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ NEET की तैयारी को भी गंभीरता से आगे बढ़ाया। नियमित कक्षाओं, टेस्ट सीरीज, प्रश्नों के अभ्यास, कमजोर टॉपिक्स पर विशेष ध्यान और शिक्षकों के मार्गदर्शन के साथ उन्होंने अपनी तैयारी को व्यवस्थित किया।
प्रेमलता की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की ओर से भी उन्हें पढ़ाई में सहयोग प्रदान किया गया, ताकि आर्थिक परेशानी उनकी तैयारी में बाधा न बने।

एक साल की कड़ी मेहनत ने बदल दी जिंदगी

अभ्यास से जुड़ने के बाद करीब एक वर्ष तक प्रेमलता ने पूरी लगन के साथ NEET की तैयारी की। M.Sc. की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने दोनों को संतुलित करते हुए लगातार मेहनत जारी रखी।
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और NEET-2026 में शानदार सफलता प्राप्त कर उन्होंने GMC भोपाल में MBBS की सीट हासिल कर ली।

अभ्यास के डायरेक्टर बोले- प्रतिभा गांव में भी है, जरूरत है सही मार्गदर्शन की

अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने प्रेमलता की सफलता पर कहा कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे स्कूल की मोहताज नहीं है। यदि विद्यार्थी में मेहनत और आगे बढ़ने का जुनून हो तथा उसे सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो गांव और सामान्य आर्थिक परिस्थितियों से आने वाला विद्यार्थी भी देश की कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रेमलता की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपने सपनों को छोटा समझ लेते हैं। प्रेमलता ने M.Sc. की पढ़ाई के साथ NEET की तैयारी करते हुए यह साबित किया कि सही दिशा, निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अब गांव की बेटी बनेगी डॉक्टर

गांव के शासकीय विद्यालय से पढ़ाई शुरू करने वाली प्रेमलता अब GMC भोपाल में MBBS की पढ़ाई करेंगी। उनका डॉक्टर बनने का सपना अब साकार होने की दिशा में बढ़ चुका है। उनकी सफलता से उनके परिवार के साथ-साथ उनके गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। प्रेमलता की सफलता पर अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की टीम ने उनके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। संस्थान की टीम ने परिवार का मिठाई खिलाकर सम्मान किया और प्रेमलता के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बनबनी जैसे छोटे से गांव से निकलकर GMC भोपाल तक पहुंची प्रेमलता की यह कहानी साबित करती है कि सपनों को पूरा करने के लिए बड़े शहर नहीं, बल्कि बड़ा हौसला और निरंतर मेहनत जरूरी है।