रतलाम मनरेगा में भ्रष्टाचार पर सीईओ का बड़ा एक्शन

​जिला प्रशासन द्वारा की गई इस सीधी कार्रवाई से योजना में फर्जीवाड़े और लापरवाही करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

रतलाम मनरेगा में भ्रष्टाचार पर सीईओ का बड़ा एक्शन

रतलाम जिले में 771 निष्फल कार्यों से 35.83 लाख रुपए की रिकवरी

⚫ ​रतलाम जनपद शीर्ष पर

⚫ ​"शासकीय धन का सही उपयोग प्राथमिकता, दोषियों पर जारी रहेगी कठोर कार्रवाई"

हरमुद्दा
​रतलाम, 10 सितंबर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में शासकीय धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की है। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुश्री वैशाली जैन के निर्देशन में चलाए गए अभियान के तहत जिले की 6 जनपद पंचायतों से कुल 35,83,542 रुपये की वसूली की गई है। जिला प्रशासन द्वारा की गई इस सीधी कार्रवाई से योजना में फर्जीवाड़े और लापरवाही करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

सीईओ वैशाली जैन

जनपद पंचायत वार वसूली का ब्योरा

जिले में कुल 771 निष्फल व्यय कार्यों को चिह्नित कर उनसे 32,96,077 रुपये तथा अन्य मदों से 2,87,465 रुपये की रिकवरी की गई।

रतलाम जनपद (शीर्ष पर): सबसे अधिक 211 कार्यों से 13,51,673 रुपये और अन्य मदों से 25,166 रुपये समेत कुल 13,76,839 रुपये वसूले गए।

जावरा जनपद: 113 कार्यों से 4,24,520 रुपये और अन्य मदों से 1,61,118 रुपए मिलाकर कुल 5,85,638 रुपए की रिकवरी हुई।

बाजना जनपद: 96 कार्यों से 4,45,566 रुपए और अन्य मदों से 1,01,181 रुपये मिलाकर कुल 5,46,747 रुपये की राशि जमा कराई गई।

आलोट जनपद: 141 निष्फल कार्यों से कुल 4,02,247 रुपए की वसूली की गई।

पिपलौदा जनपद: 109 निष्फल व्यय कार्यों से कुल 3,71,271 रुपए वसूले गए।

सैलाना जनपद: 101 कार्यों के सापेक्ष कुल 3,00,800 रुपए की वसूली सुनिश्चित की गई।

​"शासकीय धन का सही उपयोग प्राथमिकता, दोषियों पर जारी रहेगी कठोर कार्रवाई"

​सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। योजना में पारदर्शिता और जनता के पैसे का सही इस्तेमाल सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में भी किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, कार्यों में लापरवाही या निष्फल व्यय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के साथ कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।