रतलाम में सकल हिंदू समाज की बैठक: गणेश उत्सव में दिखेगी भक्ति और जनजागृति
⚫ अश्लीलता व फुहड़ता पर पूर्ण रोक का निर्णय
हरमुद्दा
रतलाम, 6 सितंबर। आगामी गणेश स्थापना उत्सव और प्रतिमा विसर्जन पर्व को पूर्ण भक्ति, श्रद्धा, अनुशासित परंपरा और सामाजिक समरसता के साथ संपन्न कराने हेतु जेएमडी पैलेस में सकल हिंदू समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। धर्म, भक्ति और जनजागृति के इस साझा मंच पर उत्सव के स्वरूप को गरिमामय बनाने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक कृष्णकांत पांडेय ने उपस्थित जनसमुदाय से सीधा संवाद स्थापित किया। श्री पाण्डेय ने पर्व को धार्मिक मर्यादाओं के अनुकूल मनाने का आह्वान किया, जिस पर प्रबुद्धजनों ने कई सकारात्मक सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक का संचालन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सह सेवा प्रमुख पवन जायसवाल सामाजिक समरसता सहित पांच परिवर्तन पर भी जोर दिया
अखाड़ों और पंडालों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
तैयारियों की विस्तृत जानकारी देते हुए रशेस राठौर ने शहर के सक्रिय व निष्क्रिय अखाड़ों की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया। बैठक में उत्सव समितियों और पंडाल आयोजकों के लिए 'क्या करें और क्या न करें' की आचार संहिता पर विशेष जोर दिया गया।
फुहड़ता व हाउजी पर प्रतिबंध: आयोजन स्थलों पर किसी भी प्रकार के अश्लील व फुहड़ प्रदर्शन पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। उत्सव परिसर में हाउजी जैसे व्यावसायिक व मनोरंजक खेल संचालित नहीं किए जाएंगे।
मर्यादित शोभायात्रा: सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर भगवान के स्वरूप अथवा झांकियों का अभद्र/अनुचित प्रदर्शन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
व्यवस्था व दूरी: गणेश विसर्जन एवं स्वागत मार्गों पर लगने वाले स्वागत मंचों के बीच एक निश्चित तय दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा ताकि यातायात व सुरक्षा व्यवस्था सुचारू रहे।
जिम्मेदारियों का आवंटन और समाज की सहभागिता
उत्सव के सुगम संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और जनजागृति के उद्देश्य से सकल हिंदू समाज द्वारा विभिन्न टोलियों का गठन कर पदाधिकारियों को दायित्व सौंपे गए।
यह थे मौजूद

बैठक में रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, उपाध्यक्ष गोविंद काकानी, प्रवीण सोनी, नगर निगम अध्यक्ष मनीषा शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय सहित सन्तजन, विभिन्न समाजों के प्रमुख, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में गणेश उत्सव को धार्मिक चेतना, अनुशासन और सामाजिक सरोकार का प्रतीक बनाने का संकल्प लिया।
Hemant Bhatt