फैसला : औद्योगिक क्षेत्र स्थित भूमि का दावा निरस्त, करोड़ों की जमीन को किया शासकीय घोषित 

फैसला : औद्योगिक क्षेत्र स्थित भूमि का दावा निरस्त, करोड़ों की जमीन को किया शासकीय घोषित 

जनता चुना उद्योग के पार्टनर को मिली थी 60 हजार वर्ग फीट जमीन

हरमुद्दा
रतलाम 24 जनवरी। औद्योगिक क्षेत्र स्थित 60000 वर्ग फीट की शासकीय भूमि पर कब्जे को लेकर न्यायालय में चल रहे विवाद पर न्यायालय ने वादी अशोक कुमार असेहा के दावे  को निरस्त कर उसे शासकीय भूमि घोषित किया। भूमि की कीमत करोड़ों में है। 

शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी

अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने हरमुद्दा को बताया कि  जनता चुना उद्योग को 99 वर्ष की अवधि के लिए 28 मई 1981 को औद्योगिक क्षेत्र स्थित प्लाट क्रमांक 64 दिया गया था।  लेकिन फर्म के भागीदार लालता प्रसाद,  रामधन खंडेलवाल एवं रमेशचंद्र राठी ने चुना उद्योग का संचालन नहीं किया। समय पर भू भाटक राशि का भुगतान नहीं किया था। लीज शर्तों का पालन नहीं करने पर महाप्रबंधक उद्योग विभाग रतलाम द्वारा जनता चुना उद्योग को दी गई भूमि आवंटन निरस्त कर कब्जा ले लिया था, लेकिन जनता चुना उद्योग के भागीदार लालता प्रसाद के पुत्र अशोक कुमार असेहा निवासी सिखवाल नगर रतलाम ने  23 मार्च 2018 को न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया कि मैं वहां पर व्यवसाय करता हूं और मेरा कब्जा है।उद्योग विभाग ने असत्य आधारों पर भूमि आवंटन को निरस्त किया है। 

वादी नहीं था भागीदार

शासन की ओर से पक्ष रखा गया की वादी अशोक कुमार जिस समय भूमि आवंटन किया गया था, उस समय भागीदार नहीं थे। फर्म के सभी भागीदार ने दावा नहीं लगाया हैl भागीदारी फर्म का विघटन हो चुका है। इसलिए दावा निरस्त किया जाए। वादी एवं प्रतिवादी की साक्षी को सुनकर चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड आकांक्षा शर्मा ने वादी का दावा निरस्त कर दिया। प्रतिवादी शासन की ओर से  सफल पैरवी अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी द्वारा की गई l