रतलाम रेलवे ग्राउंड पर मुन्नाभाइयों का दुस्साहस, सतर्कता से एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़
इस कार्रवाई से परीक्षा केंद्र पर हड़कंप मच गया, वहीं रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले किसी भी फर्जी अभ्यर्थी को बख्शा नहीं जाएगा।
⚫ बायोमेट्रिक जांच और सख्ती के आगे फेल हुई 'मुन्नाभाइयों' की चाल
⚫ ग्रुप-डी परीक्षा के अंतिम दिन पकड़े गए 2 फर्जी अभ्यर्थी
⚫ यूपी से आए थे 'डमी कैंडिडेट'
हरमुद्दा
रतलाम, 9 सितंबर। पश्चिम रेलवे के रतलाम स्थित रेलवे ग्राउंड पर चल रही आरआरबी रेलवे ग्रुप-डी (लेवल-1) की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के अंतिम दिन बुधवार को रेलवे प्रशासन और सुरक्षा बलों की सतर्कता से एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। सरकारी नौकरी का शॉर्टकट तलाश रहे दो मूल अभ्यर्थियों की जगह दौड़ लगाने पहुंचे दो 'मुन्नाभाइयों' को मौके पर ही धर दबोचा गया। पकड़े गए दोनों फर्जी परीक्षार्थी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के रहने वाले हैं।
बायोमेट्रिक जांच और सख्ती के आगे फेल हुई 'मुन्नाभाइयों' की चाल
रेलवे में पक्की नौकरी हासिल करने के लिए रची गई इस साजिश का पर्दाफाश अभ्यर्थियों के सत्यापन और बायोमेट्रिक प्रक्रिया के दौरान हुआ।
केस 1: अभ्यर्थी मनीष कुमार (निवासी- फिरोजाबाद, यूपी) को 1000 मीटर की मैदानी दौड़ में भाग लेना था। हालांकि, अपनी जगह उसने पंकज यादव (पिता- भूरेसिंह, निवासी- फिरोजाबाद) को फर्जी अभ्यर्थी बनाकर मैदान में उतार दिया।
केस 2: दूसरा मामला अभ्यर्थी अनूप (20 वर्ष, पिता- राम किशोर दिवाकर, निवासी- सिरसागंज, फिरोजाबाद) का सामने आया। अनूप ने अपने स्थान पर गौरव (21 वर्ष, पिता- दिगंबर, निवासी- शिकोहाबाद, फिरोजाबाद) को शारीरिक परीक्षा पास कराने के लिए भेजा था।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से बेनकाब हुआ खेल
शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंतिम दिन रेलवे ग्राउंड पर अधिकारियों की पैनी नजर और आधुनिक बायोमेट्रिक क्रॉस-चेकिंग के दौरान दोनों डमी उम्मीदवारों के फिंगरप्रिंट और फोटो का मिलान मूल डेटा से नहीं हुआ। कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों आरोपियों ने सच उगल दिया और स्वीकार किया कि वे दूसरे अभ्यर्थियों को रेलवे में नौकरी दिलाने के मकसद से फर्जी तरीके से टेस्ट देने पहुंचे थे।
जीआरपी और आरपीएफ पुलिस कर रही है पूरे नेटवर्क की जांच

जीआरपी थाना प्रभारी श्री पाटीदार
घटना के तुरंत बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। जीआरपी थाना प्रभारी सोहनलाल पाटीदार ने बताया कि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई संगठित 'सॉल्वर गैंग' या बड़ा रैकेट तो काम नहीं कर रहा है। मूल अभ्यर्थियों मनीष कुमार और अनूप के खिलाफ भी मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं, साथ ही उन्हें रेलवे की भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाओं के लिए डिबार (प्रतिबंधित) करने की कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई से परीक्षा केंद्र पर हड़कंप मच गया, वहीं रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले किसी भी फर्जी अभ्यर्थी को बख्शा नहीं जाएगा।
Hemant Bhatt