दुख की घड़ी में भी सामाजिक सरोकार: दिवंगत भगवंती कुंवर राठौर के परिजनों ने कराया नेत्रदान
⚫ दो लोगों के जीवन में फैलेगा उजाला
⚫ त्रिवेणी मुक्ति धाम पर हुई सभा में दी श्रद्धांजलि
हरमुद्दा
रतलाम, 12 सितंबर। दुख और शोक के क्षणों में भी सामाजिक सरोकार और मानवता की मिसाल पेश करते हुए राठौर परिवार ने एक अनुकरणीय पहल की है। साहित्यकार एवं जनवादी लेखक संघ रतलाम के सचिव रणजीत सिंह राठौर की पूज्य माताजी श्रीमती भगवंती कुंवर राठौर के देहावसान के पश्चात परिजनों ने सर्वसम्मति से उनके नेत्रदान का निर्णय लिया। इस पुनीत कार्य से दो जरूरतमंद व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आने की संभावना है।

दिवंगत के पुत्र रणजीत सिंह राठौड़ तथा पुत्रवधू श्रीमती मीनाक्षी कुंवर राठौड़ (राष्ट्रीय संगठन महामंत्री, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं राष्ट्रीय महासचिव, राजपूत एकता महासभा) सहित समस्त परिवारजनों ने इस कठिन समय में भी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए नेत्रदान की स्वीकृति दी।
मेडिकल कॉलेज और 'नेत्रम' का त्वरित समन्वय
परिवार की सहमति मिलते ही शासकीय मेडिकल कॉलेज, रतलाम की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचित किया गया। उनके कुशल निर्देशन तथा नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर राजवंत सिंह एवं विनोद कुशवाहा की टीम ने मौके पर पहुँचकर प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और सुचारू रूप से पूरा कराने में 'नेत्रम' संस्था ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था के सदस्य शलभ अग्रवाल ने मेडिकल टीम को दिवंगत के निवास स्थान तक पहुँचाने एवं वापस लाने की संपूर्ण व्यवस्था संभाली। इस दौरान ओमप्रकाश अग्रवाल, शलभ अग्रवाल, भगवान ढलवानी और सुशील मीनू माथुर सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
प्रशस्ति-पत्र देकर परिजनों का सम्मान
नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन एवं नेत्रम संस्था की ओर से शोकाकुल परिवार को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर उनकी उदारता और मानवतावादी सोच का सम्मान किया गया। नेत्रम संस्था ने परिजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि नेत्रदान एक ऐसा महादान है जो मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन का अंधेरा दूर कर सकता है। संस्था ने आमजन से भ्रांतियों से ऊपर उठकर नेत्रदान अभियान में आगे आने की अपील की।
त्रिवेणी मुक्तिधाम में दी गई अंतिम विदाई
शनिवार को दिवंगत भगवंती कुंवर राठौर की अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान दीनदयाल नगर से प्रारंभ होकर त्रिवेणी मुक्तिधाम पहुंची। यहाँ पुत्र रणजीत सिंह, विक्रम सिंह, पौत्र युगांतर सिंह, एकांत सिंह राठौड़ तथा प्रपौत्र युवराज सिंह व कुलदीप सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़े गणमान्य जन
मुक्तिधाम पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों एवं सामाजिक संगठनों ने दिवंगत की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के सामाजिक निर्णय की सराहना की। श्रद्धांजलि देने वालों में शामिल रहे।
साहित्य एवं शिक्षा जगत: वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान, जनवादी लेखक संघ के आशीष दशोत्तर, शिक्षा विभाग के त्रिभुवनेश भारद्वाज, शिक्षक सांस्कृतिक मंच के श्याम सुंदर भाटी।
जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठन: पूर्व ग्रामीण विधायक दिलीप मकवाना, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एम. एल. नगावत, पी.टी.आई यूनियन के आर.सी. तिवारी, प्रोग्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन के कीर्ति कुमार शर्मा।
समाज एवं संगठन प्रतिनिधि: राजपूत समाज चारभुजा नाथ के भारत सिंह सिसोदिया, बीएमएस के अजय कटारिया, विनोद झालानी, दुर्गेश सुरोलिया तथा राजपूत नवयुवक मंडल के चरण सिंह यादव।
राठौर परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है कि कैसे व्यक्तिगत शोक के क्षणों में भी मानवता की सेवा का दीया जलाया जा सकता है।
Hemant Bhatt