एक पंथ दो काज: रतलाम की 301 प्राथमिक शालाओं में छत मरम्मत के साथ जल संरक्षण की अनुकरणीय पहल
⚫ टपकती छतों से मुक्ति
⚫ लाखों लीटर जल का संचयन
⚫ शिक्षा के साथ पर्यावरण संवर्धन का संदेश
हरमुद्दा
रतलाम, 15 सितंबर। जिले की प्राथमिक शालाओं में अब बच्चे न केवल टपकती छतों से मुक्त होकर सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं, बल्कि वही शालाएं जल संरक्षण का केंद्र भी बन चुकी हैं। स्कूल का छत का पानी सीधे जमीन में संचित हो रहा है।

सीईओ जैन
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री वैशाली जैन की विशेष पहल पर जिले की 301 प्राथमिक शालाओं में छत मरम्मत के साथ-साथ रूफ वाटर हार्वेस्टिंग (Roof Water Harvesting) संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। यह पहल शिक्षा के अधिकार को पर्यावरण और भूजल संरक्षण से जोड़ने का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती है।
प्रमुख उपलब्धियां और बदलाव

टपकती छतों से मुक्ति: बारिश के मौसम में कक्षाओं में पानी टपकने की पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हुआ है। इससे बच्चों और शिक्षकों को बैठने और अध्यापन में होने वाली असुविधा खत्म हो गई है।
भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge): शाला भवनों की छतों पर गिरने वाले बारिश के पानी को अब नालियों में बहकर बर्बाद होने के बजाय पाइपलाइन के जरिए हार्वेस्टिंग सिस्टम तक पहुंचाया जा रहा है।
लाखों लीटर जल का संचयन: इस पहल से हर साल लाखों लीटर वर्षा जल सीधे जमीन के अंदर पहुंचेगा, जिससे आसपास के क्षेत्र के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार होगा।
जनपदवार उपलब्धि : आलोट की 76, बाजना की 38, जावरा की 53, पिपलौदा की 43 तथा सैलाना की 91 प्राथमिक शालाएं शामिल हैं। इस प्रकार कुल 301 प्राथमिक शालाओं में यह कार्य किया गया है।
शिक्षा के साथ पर्यावरण संवर्धन का संदेश
विद्यालय केवल ज्ञान बांटने की जगह नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक गढ़ने के केंद्र होते हैं। छतों की मरम्मत से बच्चों को सुरक्षित और सुखद शैक्षणिक माहौल मिला है, वहीं दूसरी ओर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को देखकर बच्चे छोटी उम्र से ही जल संरक्षण का व्यावहारिक पाठ सीख रहे हैं। जिला प्रशासन की यह बहुआयामी रणनीति आने वाले समय में जिले के जल-स्तर को बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगी।
Hemant Bhatt