फैसला : दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष की सजा

फैसला : दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष की सजा

पीड़िता को जबरदस्ती मोटरसाइकिल पर स्टेशन रोड से बिठाकर ले गया था आरोपी

⚫ डीएनए रिपोर्ट थी धनात्मक

हरमुद्दा
रतलाम 14 मार्च। लगभग 2 वर्ष पूर्व दिलबहार चौराहा से आगे शर्मा रेस्टोरेंट के सामने से पीड़िता और  उसके बहन के लड़के को दो मोटरसाइकिल पर जबरदस्ती ले जाने के तीन आरोपियों में से एक आरोपी को न्यायालय ने 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। प्रकरण का निराकरण 45 कार्य दिवस में किया गया।

अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी

अपर लोक  अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने बताया कि घटना 28 फरवरी 2024 की है। आरोपी दिलीप पिता पीरचंद  ( उम्र 19 वर्ष ) निवासी ग्राम बाली  थाना सरवन अपने दो दोस्तों बहादुर पिता कैलाश ( उम्र 23 वर्ष ) निवासी ग्राम अमरपुरा एवं प्रकाश पिता मोहन  ( उम्र 20 वर्ष) निवासी ग्राम जंबूरिया के साथ घटना दिनांक को शाम 6:00 बजे दो अलग-अलग मोटरसाइकिल से स्टेशन रोड रतलाम पहुंचे थे। जहां पीड़िता अपनी बहन के लड़के के साथ बातचीत कर रही थी। आरोपी दिलीप ने पीड़िता का हाथ पकड़ कर उसे बोला कि चुपचाप मेरे साथ चल नहीं तो जान से खत्म कर दूंगा। पीड़िता के बहन के लड़के को दो अन्य आरोपियों ने अपनी मोटरसाइकिल पर जबरदस्ती बिठाया और पीएनटी कॉलोनी स्थित कमरे पर ले गए  जहां रात भर रखा, जहां आरोपी दिलीप ने पीड़िता के साथ उसकी मर्जी के बिना दुष्कर्म किया तथा उसकी बहन के लड़के को अन्य दो आरोपियों ने दूसरे कमरे में बंद रखा ।

भाई के पहुंचने पर आरोपी हो गए फरार

घटना की सूचना पीड़िता के भाई को मिली। वह सुबह 7:00 बजे पीएनटी कॉलोनी पहुंचा तो आरोपी मौके से भाग गए। भाई अपनी बहन व भांजे को साथ में लेकर पुलिस थाना स्टेशन रोड पहुंचा जहां आरोपी के विरुद्ध पीड़िता ने रिपोर्ट लिखाई। विवेचना पूर्ण कर आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में अप्रैल 2024 में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।

नवंबर 2024 से हुई साक्ष्य प्रारंभ

प्रकरण तृतीय सत्र न्यायाधीश  बरखा दिनकर के न्यायालय में विचाराधीन था। जहां 7 नवंबर 2024 से साक्षी के कथन प्रारंभ हुई। कुल 9 गवाहों के कथन हुए एवं  37 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। आरोपी दिलीप की डीएनए रिपोर्ट धनात्मक पाई गई जिससे दुष्कर्म की पुष्टि हुई। प्रकरण की सुनवाई 45 कार्य दिवस में पूर्ण की।

पीड़िता के बयान बने सजा का आधार

प्रकरण में पीड़िता ने अपने साथ हुई घटना को न्यायालय में बताया था। आरोपी दिलीप द्वारा जबरदस्ती दुष्कर्म करना बताया था। अन्य दो आरोपी बहादुर तथा प्रकाश के विरुद्ध कोई साक्षी नहीं होने पर उन्हें दोष मुक्त किया गया। प्रकरण में आरोपी दिलीप को भारतीय दंड संहिता की धारा 366 , 376 (2) ऐन, 506 में दोषसिद्ध होने पर   10 वर्ष , 7 वर्ष एवं 3 वर्ष की सजा सुनाई एवं साढे  तीन हजार का जुर्माना लगाया। सभी सजा साथ-साथ चलेगी। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी  अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी द्वारा की गई।