कुटुम्ब न्यायालय की पहल : आए थे तलाक लेने, मगर संतान के भविष्य की बात समझाई, तो साथ रहने की बात मन में आई

कुटुम्ब न्यायालय की पहल : आए थे तलाक लेने, मगर संतान के भविष्य की बात समझाई, तो साथ रहने की बात मन में आई

2022 में हुआ था विवाह

⚫ अप्रैल 24 से रहने लगे दोनों अलग-अलग

⚫ सुखद भविष्य के लिए भेंट किए पौधे

हरमुद्दा
रतलाम, 13 सितंबर। वैचारिक मतभेद चलते पति-पत्नी अलग रहने लगे थे। तलाक के लिए आवेदन दिया था, मगर कुटुंब न्यायालय ने प्रकरण को गंभीरता से समझा और संतान के भविष्य की बात समझाई तो तलाक लेने वाले दंपति साथ रहने के लिए राजी हो गए।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश नीरज पवैया ने बताया कि पत्नी ‘एक्स‘ एवं पति ‘वाय‘ के मध्य अप्रैल 2022 में विवाह होने के पश्चात् वैचारिक मतभेद होने से वे 23 अप्रैल 2024 से पृथक-पृथक निवास करने लगे और उनके द्वारा 6 अगस्त 2025 को सहमति से तलाक के लिए याचिका प्रस्तुत की गई थी।

दोनों के साथ रहने के बताएं फायदे 

उभयपक्ष की एक पुत्री भी पैदा हुई थी। उभयपक्ष को उनके पृथक-पृथक निवास करने से उनकी पुत्री के भविष्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव के बारे में समझाइश दी गई तथा साथ-साथ रहने पर उनके एवं पुत्री के भविष्य में क्या-क्या फायदा होंगे, इसके संबंध में भी उन्हें समझाइश दी गई जिस पर उनके द्वारा साथ निवास करना स्वीकार किया। नेशनल लोक अदालत में उपस्थित होकर प्रकरण में कार्यवाही समाप्त कराने के उपरांत एक साथ रहने के लिए साथ में चले गए।

पत्नी ने स्वयं और पुत्र के लिए भरण पोषण मांग की थी पति से

इसी प्रकार पत्नी ‘एक्स‘ द्वारा स्वयं एवं पुत्र के भरण पोषण के लिए पति ‘वाय‘ के विरूद्ध याचिका प्रस्तुत की थी, जिसमें उसके द्वारा पति एवं उसके परिजनों के विरूद्ध दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने एवं खाने पीने का सामान छिपाकर रख देने के आक्षेप लगाए गए थे। उभयपक्ष का 21जून 2022 को विवाह हुआ था, लेकिन लगभग 05 माह बाद ही वे प्रथक निवास करने लगे थे। 

अलग रहने के बताए दुष्परिणाम

उभयपक्ष को वैवाहिक महत्व के बारे में समझाया गया और साथ रहने के सुखद परिणाम तथा पृथक रहने के दुष्प्रभावों के संबंध में समझाइश दी गई। उभयपक्ष के अधिवक्तागण द्वारा भी पक्षकारों को समझाया गया, जिसके उपरांत उनके द्वारा नेशनल लोक अदालत में साथ रहने का निर्णय लिया गया और आज साथ रहने के लिये रवाना हुए। इसी प्रकार दो अन्य प्रकरण भी पत्नी द्वारा पति के विरूद्ध भरण पोषण दिलाये जाने के लिए पेश किए थे जिनमें भी उनको समझाइश दिए जाने के उपरांत वे साथ निवास करने के लिए सहमत हुए और उन्हें साथ में निवास करने के लिए न्यायालय से भेजा गया।

सुखद भविष्य के लिए भेंट किए पौधे

साथ जाने वाले पक्षकारों को प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री नीना आशापुरे, की ओर से सुखद भविष्य के लिए पौधे भी भेंट किए गए। उन्हें एवं उनके परिजनों को मिठाई खिलाई। सुखद भविष्य की शुभकामनाएं देकर साथ रहने के लिए भेजा गया।