धर्म संस्कृति : बनना चाहते थे 'मेजर' लेकिन बन गए 'माइंड मेकर'
⚫ गणिवर्य श्री तारकचन्द्रसागर जी म.सा को पंन्यास पदवी प्रदान
⚫ 28 साल पहले बंधु बेलड़ी आचार्यश्री से ली दीक्षा
हरमुद्दा
रतलाम, 1 मई। बचपन से सपना देखा था कि सेना में मेजर बनाना है और देश के दुश्मनों को सबक सीखना है लेकिन जब भगवान महावीर स्वामी के अहिंसा के सिद्धांत को गहराई से समझा तो 'मेजर' की जगह 'माइंड मेकर' बनाने की राह चुनी। 28 साल पहले बंधु बेलड़ी आचार्यश्री से दीक्षा ली। युवा साहित्य सर्जक के रूप में सैकड़ों किताबे लिखकर हिंसक मनोवृति को अहिंसा, करुणा, सद्भावना और राष्ट्रीयता में बदलने की कलम साधना में जुट गये। ऐसे ख्यातनाम लेखक, चिन्तक, प्रखर विचारक गणिवर्य श्री तारकचन्द्रसागर जी म.सा को पंन्यास पदवी प्रदान की गई।

मुनिराज श्री के प्रथम व्याख्यान
काटजू नगर श्रीसंघ ने श्री मृदुलधाम पर बंधु बेलड़ी आचार्य श्री जिन-हेमचन्द्रसागर सूरीश्वर जी म.सा. की मुख्य निश्रा में पद प्रदान पर्व रखा। यहां आचार्य श्री नयचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री प्रसन्नचन्द्रसागर सूरिजी म.सा,आचार्य श्री विरागचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री पदमचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री आनंदचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, गणिवर्य श्री तारकचन्द्रसागरजी म.सा. एवं गणिवर्य श्री अजितचन्द्रसागरजी म.सा. एवं साध्वी श्री अमीपूर्णाश्रीजी म.सा, साध्वी श्री अमीदर्शाश्रीजी म.सा. आदि श्रमण श्रमणी वृंद की निश्रा रही। काटजू नगर निवासी रहे मुनिराज श्री सिद्धर्षिचन्द्रसागर जी म.सा. ने श्री मृदुलधाम पर प्रथम व्याख्यान दिए।
पंन्यासश्री को प्रथम सामूहिक वंदन

कोई तीन घंटे से अधिक समय तक चले पदवी महोत्सव में विधिविधानपूर्वक श्रीनंदी के समक्ष आचार्य श्री के मार्गदर्शन में गणिवर्यश्री ने अहोभाव के साथ सम्पूर्ण क्रिया पूर्ण की। जिसके बाद जैसे ही उन्हें पंन्यास पदवी दी गई सकल श्रीसंघ ने अक्षत और जयघोष के साथ उनका वधामना किया। लाभार्थी परिवारों ने उन्हें मन्त्र पट एवं पोथी आदि भेंट किए। श्रीसंघ ने नूतन पंन्यासश्री को प्रथम सामूहिक वंदन किया। गुजरात के मेहसाना से सांसद हरिभाई पटेल ने अपनी शुभेच्छा व्यक्त की। यहां गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रान्तों से श्रीसंघ और समाजजन इस क्षण के साक्षी बनने के लिए रतलाम पहुँचे थे। संचालन गणतंत्र मेहता ने किया। काटजू नगर श्रीसंघ की ओर से आचार्यश्री को काम्बली भेंट की गई।
पद की योग्यता गुरुकृपा का प्रसाद

नूतन पंन्यासश्री ने अपने प्रथम व्याख्यान में कहा कि किसी भी पद की योग्यता बगैर गुरुकृपा के प्राप्त नहीं होती है। इसके लिए सतत पुरुषार्थ जरूरी होता है।गुरुतत्व के प्रति श्रध्दा जरूरी है।इसी श्रध्दा के सहारे हम अपना आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते है। उन्होंने कहा कि किसी भी पद की जिम्मेदारी बहुत बडी होती है। मेरा यह प्रयास रहेगा कि मै इस जिम्मेदारी पर खरा उतरते हुए जिनशासन की सेवा में तत्पर रहूँ।
बच्चों के बैंड की प्रभावी प्रस्तुति

इसके पूर्व काटजू नगर में समस्त गुरु भगवंत के मंगल पदार्पण पर सूरज हाल से प्रवेश चल समारोह निकाला गया। मुनिराज श्री सिद्धर्षिचन्द्रसागर जी म.सा.के सांसारिक परिवार नगीनकुमार-प्रवीण-कविता पालरेचा के निवास पर आचार्यश्री ने मांगलिक प्रदान किये।


परिजनों ने उत्साह और उमंग के साथ गुरु भगवंत का वधामना करते हुए आशीर्वाद लिया। यंहा से मृदुल धाम के लिए चल समारोह निकला, जिसमे बड़ी संख्या में ढोल ढमाके और बैंडबाजे के साथ समाजजन, जैन धर्म की पताकाओं के साथ बच्चों का बैंड, पार्श्व सामायिक मंडल और मृदुल धाम सामायिक मंडल सहित अन्य संस्थाओं की महिलाएं मंगल कलश लिए शामिल हुई। मार्ग में समाजजनों ने जगह जगह गहुली करते हुए दर्शन वंदन किए।

आचार्य बंधु बेलड़ी के साथ धर्मनिष्ठ प्रवीण पालरेचा
वर्धमान तप ओली पारणा
2 मई शुक्रवार को बंधु बेलड़ी आचार्य श्री अपने विशाल श्रमण परिवार के साथ शिष्यरत्न मुनिराज श्री प्रियचन्द्रसागरजी म.सा. की वर्धमान तप की 55 वीं ओली के पारणा महोत्सव में निश्रा प्रदान करेंगे। मुनिराज के सांसारिक परिजन श्री समरथमल चाणोदिया परिवार द्वारा तप अनुमोदनार्थ चल समारोह सुबह 8 बजे कालेज रोड से थावरिया बाजार तक रखा गया है। सागोद तीर्थ में 11 दिवसीय भव्य अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को ज्वारारोपण विधान एवं श्री पंच कल्याणक पूजन रखा गया। ज्वारारोपण के लाभार्थी श्रीमती सम्पतबेन लालचंदजी बम्बईवाला परिवार ने विधि-विधान से पूजन किया। 2 मई शुक्रवार को श्री आदिनाथ पंचकल्याणक पूजा होगी।
Hemant Bhatt