रतलाम में 'रीढ़ की हड्डी' तोड़ रहे अमानक स्पीड ब्रेकर

आखिर रतलाम का प्रशासनिक अमला और नगर निगम प्रशासन किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या नेताओं और अफसरों की नींद तब खुलेगी, जब इन अमानक स्पीड ब्रेकर्स की वजह से कोई अपनी जान गंवा बैठेगा?

रतलाम में 'रीढ़ की हड्डी' तोड़ रहे अमानक स्पीड ब्रेकर

जब IAS-IPS और जज के बंगलों के सामने ही बने है बिना संकेतक के अमानक स्पीड ब्रेकर

⚫ सड़कें ही जनता की जान की दुश्मन बन जाएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी

⚫ आम जनता किससे गुहार लगाए? 

हरमुद्दा
​रतलाम, 4 जुलाई। जिस शहर में जिले के सबसे रसूखदार और बड़े ओहदों पर बैठे हुक्मरानों का चौबीसों घंटे आना-जाना हो, अगर वहाँ की सड़कें ही जनता की जान की दुश्मन बन जाएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। रतलाम शहर और इसकी विभिन्न कॉलोनियों से गुजरने वाले लाखों दो पहिया और हजारों चार पहिया वाहन चालक इन दिनों सड़कों पर नहीं, बल्कि 'खतरों के खिलाड़ी' बनकर चल रहे हैं। वजह है— शहर में कुकुरमुत्ते की तरह उगे अमानक (बिना किसी नियम-कायदे के बने) स्पीड ब्रेकर, जो अब जनता के लिए 'हड्डी तोड़' मुसीबत बन चुके हैं।

​जब बड़े अफसरों को ही नजर नहीं आतीं 'छोटी' समस्याएं!

​हैरानी की बात यह है कि जिन प्रशासनिक अधिकारियों के कंधों पर शहर की कानून और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने का जिम्मा है, वे खुद इस अंधेरे के आदी हो चुके हैं।

​ऑफीसर कॉलोनी (SP बंगला)

जहाँ जिले के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और तमाम आला अधिकारी निवास करते हैं, उनके बंगले के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने बना स्पीड ब्रेकर तक सही ढंग से नजर नहीं आता। आखिर शहर के IAS और IPS अफसर इस गंभीर लापरवाही पर मौन क्यों हैं? क्या लाखों रुपयों की आलीशान, मजबूत सस्पेंशन वाली सरकारी गाड़ियों में बैठने के बाद इन बड़े अफसरों को समाज की ये बुनियादी और घातक समस्याएं दिखना बंद हो जाती हैं?

​विशेष न्यायाधीश बंगला

जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश आरपीएस चुंडावत और कुटुंब न्यायाधीश राम जी गुप्ता के बंगले के ठीक पहले और बाद में दो स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। ये ब्रेकर इतने अमानक और खतरनाक हैं कि दिन के उजाले में भी ढंग से दिखाई नहीं देते, रात के अंधेरे की तो बात ही छोड़ दीजिए। गाड़ियां अचानक इन पर से हवा में कूदती हैं, जिससे आए दिन लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

इनकी घोर उदासीनता बेहद शर्मनाक

​जिस शहर में रहकर ये अफसर अपना रसूख चला रहे हैं, जहाँ का ये 'दाना-पानी' खा रहे हैं, उसी शहर की जनता की सुरक्षा को लेकर इनकी यह घोर उदासीनता बेहद शर्मनाक है।

​न सफेद पट्टे, न संकेतक: नियमों को ठेंगा

​भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के नियमों के मुताबिक, हर स्पीड ब्रेकर पर दूर से चमकने वाले सफेद पट्टे (Reflective White Stripes) और कुछ मीटर पहले चेतावनी बोर्ड होना अनिवार्य है। लेकिन रतलाम में नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। ये ब्रेकर सड़क के रंग में ऐसे घुले-मिले हैं कि जब तक गाड़ी बिल्कुल ऊपर न पहुँच जाए, इनका पता ही नहीं चलता।

​सेहत से खिलवाड़: अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज

​इन अमानक और अचानक आने वाले स्पीड ब्रेकर्स के कारण सिर्फ गाड़ियां ही डैमेज नहीं हो रही हैं, बल्कि इंसानों के शरीर में भी गंभीर बीमारियां घर कर रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बिना चेतावनी के लगने वाले इन जोर के झटकों से लोगों की रीढ़ की हड्डी (Spine) पर सीधा और अपरिवर्तनीय असर पड़ रहा है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, कमर दर्द, स्लिप डिस्क और सायटिका जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।

चैतन्य काश्यप से लेकर प्रहलाद पटेल तक सब मौन: आखिर पार्षद कब जागेंगे?

​इस जानलेवा समस्या पर शहर के कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप, महापौर प्रहलाद पटेल, एमआईसी (MIC) मेंबर और पार्षद पूरी तरह मौन साधे बैठे हैं। जनता की टूटती कमर और गाड़ियों के टूटते पुर्जे इन जनप्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दे रहे हैं।

अपने-अपने क्षेत्र में पार्षद ही दिखाएं जिम्मेदारी और इच्छा शक्ति

बनाए ऐसे स्पीड ब्रेकर

यदि शहर के 50 पार्षद ही थोड़ी सी जिम्मेदारी और इच्छाशक्ति दिखाएं, और अपने-अपने वार्डों में बने इन अवैध व अमानक स्पीड ब्रेकर्स को मानक स्वरूप देकर उन पर सफेद पट्टियां डलवा दें, तो शहर के लाखों वाहन चालकों को बहुत बड़ी राहत मिल सकती है और उनकी सेहत भी सुरक्षित रह सकती है।

मुद्दे की बात 

आखिर रतलाम का प्रशासनिक अमला और नगर निगम प्रशासन किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या नेताओं और अफसरों की नींद तब खुलेगी, जब इन अमानक स्पीड ब्रेकर्स की वजह से कोई अपनी जान गंवा बैठेगा?