शिक्षा सरोकार : वैश्विक शिक्षा के नवाचारों से महकेगा रतलाम
⚫ सांदीपनि विद्यालय विनोबा रतलाम में हुआ अनूठा 'अकादमिक संवाद'
⚫ दुनिया के 5 सबसे बेहतरीन स्कूलों के जादुई नवाचारों पर मंथन
⚫ वर्ल्ड-क्लास, इनोवेटिव और लाइफ-चेंजिंग एजुकेशन का लिया एक सुर में संकल्प
हरमुद्दा
रतलाम, 4 जुलाई। शिक्षा के क्षेत्र में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों और बेहतरीन तौर-तरीकों को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसी सोच के साथ रतलाम के सांदीपनि विद्यालय, विनोबा में एक बेहद अनूठा और प्रेरणादायी आयोजन किया गया। यहाँ "विश्व के श्रेष्ठ विद्यालय पुरस्कार–2025 से सीख" विषय पर एक विशेष अकादमिक संवाद हुआ, जिसमें दुनिया के 5 सबसे बेहतरीन स्कूलों के जादुई नवाचारों (Innovations) पर मंथन किया गया ताकि उन्हें रतलाम के बच्चों के लिए भी लागू किया जा सके।

कार्यक्रम की शुरुआत बेहद ऊर्जावान रही। शिक्षक राजेन्द्र शर्मा द्वारा रचित विद्यालय गीत "हम हैं सांदीपनि विद्यालय" पर आधारित एंट्री रूटीन ने पूरे माहौल को उत्साह और गौरव से भर दिया।
उप प्राचार्य गजेन्द्र सिंह राठौर की परिकल्पना : स्थानीय परिस्थितियों में वैश्विक सोच

इस शानदार कार्यक्रम की परिकल्पना और संचालन गजेन्द्र सिंह राठौर ने किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्था 'टी फॉर एजुकेशन' द्वारा चुने गए विश्व के 5 सबसे श्रेष्ठ स्कूलों का परिचय देते हुए एक बेहद खूबसूरत बात कही— "प्रत्येक विद्यालय अपनी स्थानीय परिस्थितियों में कार्य करते हुए भी वैश्विक स्तर पर परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण बन सकता है।"
इन्होंने की केस स्टडी प्रस्तुत
संवाद के दौरान विद्यालय के 5 कर्मठ शिक्षकों ने दुनिया के अलग-अलग देशों के उन विनर स्कूलों की केस स्टडी प्रस्तुत की, जिन्होंने शिक्षा की परिभाषा बदल दी है:
⚫ बिद्राक्षी पंवार :

मेक्सिको (आ फावोर देल नीन्यो)360 डिग्री सामुदायिक सहयोग : अभिभावकों और स्थानीय समाज को पढ़ाई का सक्रिय हिस्सेदार बनाया।
⚫ कविता वर्मा :

यूएई (आर्बर विद्यालय)पर्यावरण साक्षरता: 'बायोडोम' (जैव-गुंबद) और प्रकृति आधारित लर्निंग से बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाया।
⚫ हर्षिता सोलंकी :

यूएसए (फ्रैंकलिन विद्यालय)फैब-लैब (Fab-Lab): हाईटेक लैब के जरिए बच्चों में साइंटिफिक सोच, डिजाइन थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को विकसित किया।
⚫ श्यामा वर्मा :

ब्राजील (एस्कोला एस्तादुअल पार्के दोस सोन्योस) 21 नवाचारी प्रोजेक्ट्स: कठिन और विपरीत परिस्थितियों के बीच भी शांति, अहिंसा और सकारात्मक स्कूल कल्चर से सामाजिक बदलाव लाया।
⚫ हीना शाह :

मलेशिया (एस.के. पुत्राजया प्रेसिन्ट 11) मानसिक स्वास्थ्य (Helpy App): 'हेल्पी' मोबाइल ऐप के जरिए बच्चों के मेंटल हेल्थ और उनके समग्र कल्याण के लिए बेहतरीन काम किया।
स्थानीय स्तर पर लागू होंगे वैश्विक अनुभव
समापन सत्र में राजाराम सेकवाडिया और शोभा ओझा ने कॉम्पिटेंसी बेस्ड एजुकेशन (दक्षता-आधारित शिक्षा) पर जोर देते हुए बताया कि कैसे इन इंटरनेशनल मॉडल्स को हम अपने रतलाम के स्कूलों में आसानी से ढाल सकते हैं।

परिवर्तन की प्रेरणा
इस संवाद से प्रेरित होकर शासकीय हाई स्कूल कनेरी से आईं शिक्षिका श्रद्धा सोनी ने कहा कि वे अपने स्कूल में इन मॉडल्स का बकायदा ट्रेनिंग सेशन रखेंगी, वहीं शिक्षिका माधुरी तलेरा ने इसे महज एक कार्यक्रम न मानकर 'परिवर्तन की प्रेरणा' बताया और अपनी क्लास में इन एक्टिविटीज को शामिल करने का संकल्प लिया।
पूरी टीम ने लिया बदलाव का संकल्प
इस ऐतिहासिक संवाद के दौरान प्राचार्य संध्या वोरा, प्रधान अध्यापक अनिल मिश्रा सहित सीमा चौहान, वंदना सोवणचा, भावना रावत, मनीषा चौधरी, सुनीता पँवार, रूपाली जैन, साक्षी शर्मा, अजय मरमट, प्रदीप वैष्णव, अमित झा, अनीता शर्मा, प्रह्लाद बैरागी और हरिओम पँवार जैसी पूरी शिक्षक टीम मौजूद रही। कार्यक्रम की टेक्निकल कमान पिंकी सोलंकी ने संभाली।

वर्ल्ड-क्लास, इनोवेटिव और लाइफ-चेंजिंग एजुकेशन का लिया एक सुर में संकल्प
अंत में सभी शिक्षकों ने एक सुर में संकल्प लिया कि वे दुनिया की इन बेस्ट प्रैक्टिसेज को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से अपने स्कूलों में लागू करेंगे, ताकि रतलाम के बच्चों को भी वर्ल्ड-क्लास, इनोवेटिव और लाइफ-चेंजिंग एजुकेशन मिल सके। निश्चित ही, सांदीपनी विद्यालय की यह पहल जिले के शिक्षा जगत में एक मील का पत्थर साबित होगी।
Hemant Bhatt