दिव्यांग की दास्तान : पेंशन के लिए परेशान, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, न जाने कब होगा निदान
सर्वाइकल कंप्रेसिव मायलोपैथी विद रेसिडुअल क्वाड्रीपैरेसिस' नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित दिव्यांग अभिषेक कुलश्रेष्ठ का कहना है "मैं पिछले दो साल से विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहा हूँ। दिसंबर 2025 से विधिवत आवेदन, अनुस्मारक (Reminders), सीएम हेल्पलाइन, आरटीआई (RTI) और प्रथम अपील तक कर चुका हूँ।
⚫ 1 महीने पहले कलेक्टर ने दिया था आश्वासन एक सप्ताह में होगा समाधान
⚫ पिता थे शिक्षा विभाग में
⚫ नियमानुसार पिता के बाद माता को और तत्पश्चात दिव्यांग बेटे को मिलनी चाहिए पेंशन
हरमुद्दा
रतलाम, 2 जून। 'सर्वाइकल कंप्रेसिव मायलोपैथी विद रेसिडुअल क्वाड्रीपैरेसिस' नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित दिव्यांग अभिषेक कुलश्रेष्ठ का कहना है "मैं पिछले दो साल से विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहा हूँ। दिसंबर 2025 से विधिवत आवेदन, अनुस्मारक (Reminders), सीएम हेल्पलाइन, आरटीआई (RTI) और प्रथम अपील तक कर चुका हूँ। लेकिन आज तक न तो मेरी चिकित्सकीय स्थिति का प्रारंभिक परीक्षण किया गया और न ही विभाग ने कोई स्पष्ट आदेश जारी किया।" पेंशन के लिए भटक रहा हूं बच्चों का भविष्य दाव पर लगा हुआ है।

एडीएम को दास्तान सुनाते हुए अभिषेक
स्थानीय कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में मंगलवार को एक बार फिर दिव्यांग अभिषेक आया। जहां 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता से पीड़ित और बेबस अभिषेक मिला। अभिषेक ने बताया कि वह पिछले दो साल से अपने हक की पारिवारिक पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। छह महीने से लगातार लिखित व दस्तावेजी कार्रवाई करने के बावजूद विभाग मुंह में दही जम के बैठा है।
2022 से है पेंशन बंद
रतलाम की अलकापुरी में रहने वाले अभिषेक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय मदन गोपाल कुलश्रेष्ठ शासकीय सेवा में व्याख्याता (Lecturer) थे। पिता के निधन के बाद उनकी माता स्वर्गीय श्रीमती पुष्पा कुलश्रेष्ठ को नियमानुसार पारिवारिक पेंशन मिल रही थी। 15 अप्रैल 2022 को माता के निधन के बाद से यह पेंशन बंद है।
गंभीर बीमारी से ग्रसित है अभिषेक
अभिषेक कुलश्रेष्ठ स्वयं 'सर्वाइकल कंप्रेसिव मायलोपैथी विद रेसिडुअल क्वाड्रीपैरेसिस' नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं और 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हैं। वे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 47(6) के अंतर्गत 'दिव्यांग आश्रित पारिवारिक पेंशन' के पूर्ण हकदार हैं।
पहले कलेक्टर ने 7 दिन में समाधान का दिया था आश्वासन
पीड़ित अभिषेक के लिए शारीरिक अक्षमता के कारण बार-बार सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ना किसी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से कम नहीं है। इसके बावजूद वे न्याय की आस में पिछले दो महीनों में चार बार (05 मई, 12 मई, 19 मई और आज 02 जून को) व्यक्तिगत रूप से कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में उपस्थित हुए। पहली बार जब कलेक्टर से मुलाकात हुए थे तब उन्होंने एक सप्ताह में समाधान का आश्वासन दिया था। मगर आज तक निदान नहीं हुआ।
आर्थिक तंगी से गुजर रहा अभिषेक का परिवार
लंबे समय से पेंशन प्रकरण लंबित रहने के कारण कुलश्रेष्ठ का परिवार गंभीर आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से गुजर रहा है। उनके दो नाबालिग बच्चों की पढ़ाई और भविष्य भी इस कछुआ चाल प्रशासनिक व्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। पीड़ित ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के प्रावधानों के तहत उनके प्रकरण का शीघ्र और निष्पक्ष निस्तारण कर न्याय प्रदान किया जाए।
Hemant Bhatt