श्राद्ध नवमी पर खेतलपुर गौशाला में अनूठी भक्ति

श्राद्ध नवमी पर खेतलपुर गौशाला में अनूठी भक्ति

⚫ गौसेवकों ने गोमाता को लगाया 11 क्विंटल से अधिक का '56 भोग' महाप्रसाद

हरमुद्दा
​रतलाम, 4 अक्टूबर। श्राद्ध पक्ष की नवमी के पावन अवसर पर शहर के खेतलपुर स्थित गौशाला में श्रद्धा, भक्ति और गौ-सेवा का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। गौसेवक परिवार द्वारा गोमाता के प्रति अटूट आस्था प्रकट करते हुए भव्य '56 भोग' महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इस दौरान गौसेवकों ने विधि-विधान और भक्ति भाव से गोमाता का पूजन-अर्चन किया तथा उन्हें विविध पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग अर्पित किया।


​11 क्विंटल से अधिक सामग्री का लगा महाभोग

आयोजन की सबसे खास और उल्लेखनीय बात यह रही कि गोमाता को अर्पित किए गए सभी 56 भोग सामग्रियों का कुल वजन 11 क्विंटल से भी अधिक था। गौसेवकों ने गोमाता के स्वास्थ्य, पोषण और रुचि का विशेष ध्यान रखते हुए इस महाप्रसाद की सूची तैयार की थी।

मिठाइयों से लेकर हरी सब्जियों तक का खास मिश्रण

56 भोग की थाली में पारंपरिक मिष्ठान से लेकर पौष्टिक आहार तक सब कुछ शामिल था। 
​पारंपरिक मिठाइयां: इमरती, रसभरी जलेबी, लापसी, मोतीचूर के लड्डू, आगरे का पेठा, घेवर, फिनी, मखाने और कई तरह की पारंपरिक मिठाइयां।
​ताजे फल व सब्जियां: 10 प्रकार के ताजे मौसमी फल और गोमाता की पसंदीदा 10 प्रकार की हरी-भरी सब्जियां।
​पौष्टिक व सुपाच्य आहार: उच्च गुणवत्ता वाला हरा चारा, विभिन्न प्रकार की खल (खली) और सूखे मेवे (ड्रायफ्रूट्स)।

श्राद्ध पक्ष में गौ-सेवा का विशेष आध्यात्मिक महत्व

गौसेवक परिवार के सदस्यों ने बताया कि धर्मग्रंथों में श्राद्ध पक्ष के दौरान गोमाता की सेवा और तृप्ति का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इसी भावना से प्रेरित होकर समस्त गौसेवकों ने एकजुट होकर इतने विशाल पैमाने पर 56 भोग तैयार कर अर्पित किए।

चर्चा और प्रेरणा का बना केंद्र

कार्यक्रम के समापन पर खेतलपुर गौशाला में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर गोमाता की भव्य आरती उतारी तथा रतलाम क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और आरोग्य की कामना की। यह आयोजन पूरे शहर में चर्चा और प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।