फैसला : हत्या के प्रयास में आरोपी गोपाल को 5 वर्ष की जेल और जुर्माना, साथी को भी सजा
⚫ मामला 2020 का
⚫ 6 साल बाद मिला पीड़ित परिवार को न्याय
हरमुद्दा
रतलाम, 7 जुलाई। जिले के ग्राम सिमलावदा खुर्द में पुरानी लेन-देन को लेकर तलवार से जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को अदालत ने कड़ा सबक सिखाया है। अष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया के न्यायालय ने आरोपी गोपाल को दोषी पाते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, हमले में साथ देने वाले दूसरे आरोपी को भी न्यायालय ने दंडित किया है।

पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक और शासकीय अधिवक्ता संजीव सिंह चौहान द्वारा की गई। उनके द्वारा प्रस्तुत मजबूत साक्ष्यों और अकाट्य तर्कों के आधार पर न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
क्या था पूरा मामला?
अतिरिक्त लोक अभियोजक श्री चौहान ने हरमुद्दा को बताया कि घटना 21 मार्च 2020 की है। फरियादी कन्हैयालाल, निवासी ग्राम सिमलावदा, गांव की ही एक दुकान से बीड़ी-माचिस लेकर लौट रहा था। तभी भैसासूरी मंदिर के सामने आरोपी गोपाल और उसके भाई संजय ने उसका रास्ता रोक लिया।
पुरानी रंजिश में गाली-गलौज : आरोपियों ने पुरानी लेन-देन की बात को लेकर कन्हैयालाल को गालियां देना शुरू कर दिया।
संजय ने पकड़ा, गोपाल लाया तलवार
विवाद बढ़ने पर आरोपी संजय ने कन्हैयालाल को थप्पड़ मारा और उसे दबोच लिया। इसी बीच आरोपी गोपाल अपने घर से नंगी तलवार उठा लाया।
जानलेवा हमला
कन्हैयालाल ने खुद को बचाने के लिए दौड़ लगाई, तो गोपाल ने पीछे से तलवार मार दी, जो उसके कंधे पर लगी। जब फरियादी ने मुड़कर देखा, तो गोपाल ने सीधे उसकी गर्दन पर जान से मारने की नियत से वार किया। कन्हैयालाल ने तलवार को हाथ से पकड़ने की कोशिश की, जिससे उसकी उंगली कटती हुई तलवार सीधे गर्दन पर जा लगी और भारी खून बहने लगा।
दौड़कर बचाई जान
फरियादी की चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे गोविंद और ईश्वर ने बीच-बचाव कर उसकी जान बचाई। बाद में घायल कन्हैयालाल को उसके पिता मांगीलाल ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज की।
पुलिस कार्रवाई और अदालती ट्रायल
थाना नामली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास), 341, 323, 294/34 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी गोपाल के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई तलवार भी जब्त की, जिसके बाद मामले में धारा 25 आयुध अधिनियम (Arms Act) का इजाफा किया गया।
न्यायालय का फैसला और सजा का विवरण

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष पुख्ता गवाह, डॉक्टरी रिपोर्ट और दस्तावेज पेश किए। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए

आरोपी गोपाल
मुख्य आरोपी गोपाल (पिता उमराव) धारा 307 IPC (हत्या का प्रयास) में 5 वर्ष का कारावास। धारा 25 आयुध अधिनियम में 2 वर्ष का कारावास।न्यायालय ने आरोपी पर कुल 12,000 रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया। सह-आरोपी संजय (पिता उमराव): धारा 323 IPC (मारपीट) में 3 माह की भुगती हुई जेल की सजा और 1,000 रुपये का अर्थदंड।
6 साल में मिला न्याय
न्यायालय के इस सख्त फैसले से पीड़ित परिवार को घटना के 6 साल बाद न्याय मिला है।
Hemant Bhatt