आंखों देखी : बावड़ी की सफाई में इनके मुंह पर मास्क, हाथ में दस्ताने और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं

आंखों देखी : बावड़ी की सफाई में इनके मुंह पर मास्क, हाथ में दस्ताने और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं

ऐसे हुई जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत

⚫ कई तो इसलिए थे जमा ताकि उनका भी फोटो आए

⚫ पार्षदों की जगह पार्षद पति की झांकी

हरमुद्दा
रतलाम, 19 मार्च। गुड़ी पड़वा नववर्ष पर जल गंगा संवर्धन की शुरुआत ऐसे हुई जिसकी चर्चा मुद्दा बन गई है। दो मुंह की बावड़ी की सफाई में इनके मुंह पर मास्क, हाथ में दस्ताने थे, उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए कुछ भी ध्यान नहीं रखा। कई तो इसलिए जमा थे ताकि उनका भी फोटो आए। पार्षदों की जगह पार्षद पति की झांकी हो रही थी। आयोजन पूरे शहर के लिए था मगर न तो पूरे एमआईसी के सदस्य और ना ही पार्षद मौजूद रहे। किसी को शहर की चिंता नहीं है। 

दो मुंह की बावड़ी की सफाई के लिए श्रमदान शुरू हुआ। महापौर, निगम अध्यक्ष कलेक्टर सहित अन्य ऊपर की सीढ़िया पर दोनों ओर पंक्तिबद्ध खड़े हो गए मुंह पर मास्क और हाथ में दस्ताने पहने उनके सामने से नीचे से आने वाली कचरे की तागारिया गुजरती रही। कुछ ने तो तगारी उठाई भी नहीं। बस हाथ दिखा दिया। काम हो गया।

जिम्मेदारों ने किया नजरअंदाज

बावड़ी शुरुआत में जो कचरे की सफाई कर रहे थे। पावड़े से तगारियों में भर रहे थे। उनके मुंह पर ना तो मास्क था और नहीं हाथों में दस्ताने। उनकी सेहत को सुरक्षा के लिए जिम्मेदारों नजरअंदाज कर दिया। हां एक बात जरूर है उनको जैकेट जरूर पहनाई गई थी, जिससे कि लगे कि यह सफाई कर्मचारी है। जब काम सफाई कर्मचारियों को ही करना है तो दिखावे की नौटंकी क्यों की जाती है?

उन्होंने भी नहीं ली सुध

यहां तक की जिले की मुखिया कलेक्टर ने भी उनकी सुध नहीं ली। वरना चाहती तो नगर निगम आयुक्त को टोंक सकती थी कि उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए बंदोबस्त क्यों नहीं किया, मगर उनको छोटे कर्मचारियों की कोई फिक्र नहीं है। छोटे कर्मचारियों की क्या कहें? उनको तो रतलाम जिले के लोगों की ही फिक्र नहीं है, तभी तो दो दिन पहले छोटी सी जिद में पूरे जिले और शहर वाले परेशान हुए। 

नहीं कोई लेना देना

श्रमदान के दौरान कई चेहरे तो ऐसे थे जिनको केवल फोटो में आना था या फिर अपने अधिकारी के समक्ष झांकी करनी थी। उनको श्रमदान से कोई लेना देना नहीं था। कुछ ने कुछ तगारी कचरा उठाया और कुछ ने वह भी नहीं, मगर श्रमदान के नाम पर ठंडी-ठंडी कुल्फी का लुत्फ जरूर लिया। 

एमआईसी सदस्य और पार्षद मिलकर भी दहाई अंक तक नहीं पहुंचे

सफाई के पहले नगर निगम तिराहे पर कार्यक्रम हुआ। मंच पर महापौर, निगम अध्यक्ष, कलेक्टर सहित अन्य लोग मौजूद थे। मगर सुनने वालों की संख्या काफी कम रही। तभी तो एमआईसी सदस्य और पार्षद मिलकर दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए। कुछ पार्षद पति ने उपस्थिति दर्ज कराई। ऐसा लगता है कि एमआईसी मेंबर और पार्षदों को जल गंगा संवर्धन जैसे खास अभियान में उनकी कोई रुचि नहीं है।

जिन्होंने दिया वोट उनमें निकलते हैं खोट

महापौर ने तो शहरवासियों में ही खोट निकाल दी, जिन्होंने वोट दिया। हर बार साफ सफाई के नाम पर गन्दगी फैलाने वालों में शहरवासियों का ही नाम लिया जाता है जबकि हाल हकीकत से हर कोई वाकिफ है कि सफाई कर्मचारी हर दिन नहीं आते हैं। कचरा संग्रहण की गाड़ियां दो-दो दिन तक नहीं आती है। जो कार्य रोज होना चाहिए, वह अभी झांकी बाजी के साथ हो रहा है। आज इस नाली की सफाई हुई। आज वहां की सफाई हुई। फोटो बनते हैं। खबरें प्रसारित होती है। इसमें पार्षद और एमआईसी सदस्यों की कोई गलती नहीं होती कि वह क्या कर रहे हैं? सफाई की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। सफाई कर्मचारी भी ऐसे ही हो गए हैं जैसे राजा महाराजा हो।