आखिर क्या चाहते हैं जिम्मेदार : कलेक्टर ऑफिस के सामने ही 'हादसों का जाल' गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा

आखिर क्या चाहते हैं जिम्मेदार : कलेक्टर ऑफिस के सामने ही 'हादसों का जाल' गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा

फोरलेन पर बिछा दिए 6-6 स्पीड ब्रेकर

⚫ अधिकारी मस्त, जनता पस्त!

⚫ स्पाइन और स्लिप डिस्क को लेकर मरीजों की संख्या में हो रही वृद्धि

हरमुद्दा
​रतलाम, 7 जुलाई। सुशासन का पाठ पढ़ाने वाले और पूरे जिले की व्यवस्था संभालने वाले कलेक्टर साहब जहाँ बैठते हैं, ठीक उसी दफ्तर के नाक के नीचे भ्रष्टाचार, अकर्मण्यता और अमानक निर्माण का ऐसा तमाशा चल रहा है कि आम जनता की जान पर बन आई है। रतलाम-इंदौर फोरलेन पर स्थित कलेक्टर ऑफिस के आगमन  और प्रस्थान के दोनों मुख्य दरवाजों पर जिम्मेदार लोक निर्माण विभाग और स्टेट हाईवे के इंजीनियरों ने मिलकर अमानक स्पीड ब्रेकर्स बना दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर दी। कहीं चार तो कहीं छह-छह स्पीड ब्रेकर एक साथ बना दिए गए हैं, जो अब वाहन चालकों के लिए काल साबित हो रहे हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। 

​ मिशा सिंह कलेक्टर, रतलाम

साहेब! दफ्तर के बाहर तो देखिए अव्यवस्था!

​बड़ा और तीखा सवाल यह उठता है कि जिस रास्ते से खुद कलेक्टर, अपर कलेक्टर और तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां दिन में दस बार गुजरती हैं, उन्हें अपने ही दफ्तर के बाहर की यह बदहाली क्यों नजर नहीं आती? क्या आलीशान और मजबूत सस्पेंशन वाली सरकारी गाड़ियों के शीशे इतने काले हैं कि बाहर तड़पती और दुर्घटनाग्रस्त होती जनता उन्हें दिखाई नहीं देती? कलेक्टर ऑफिस जैसी महत्वपूर्ण जगह के सामने अगर इस तरह का अमानक और जानलेवा निर्माण किया गया है, तो बाकी शहर की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

​छोटे पहिए वाले वाहनों के लिए 'डेथ ट्रैप' बने ये ब्रेकर

​इन छह-छह स्पीड ब्रेकर्स की लगातार मार सबसे ज्यादा दो पहिया वाहनों, खासकर छोटे पहिए वाले स्कूटर्स (जैसे एक्टिवा, जुपिटर आदि) पर पड़ रही है। लगातार छह बार गाड़ी के पहिए जब इन अमानक और ऊंचे-नीचे ब्रेकर्स पर चढ़ते-उतरते हैं, तो गाड़ी का संतुलन बिगड़ना तय है।

​महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा शिकार

जब कोई बुजुर्ग या महिला इन रास्तों से गुजरती है, तो गाड़ी संभालना उनके लिए भारी पड़ जाता है।

​मासूम बच्चों की जान जोखिम में

सबसे डरावनी और खतरनाक स्थिति तब बनती है जब कोई महिला अपनी स्कूटी या बाइक के पीछे छोटे बच्चे को बैठाकर यहाँ से निकलती है। छह बार लगने वाले लगातार झटकों से बच्चा पीछे से उछल जाता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है। या फिर दंपति गोद में बच्चों को लेकर यहां से निकलते हैं तो या तो पीछे बैठना वाला गिरेगा या उसका बच्चा उसे हाथ से छिटक जाएगा। यह कुछ नहीं होगा तो स्लिप डिस्क अथवा स्पाइन में दिक्कत जरूर शुरू हो जाएगी

​फुटपाथ पर भरा बदबूदार पानी, निकासी का कोई इंतजाम नहीं

​लापरवाही सिर्फ स्पीड ब्रेकर बनाने तक ही सीमित नहीं है। इन स्पीड ब्रेकर्स के आसपास जो फुटपाथ (Sidelanes) बनाए गए हैं, वहाँ सड़क इंजीनियरिंग की एक और बड़ी खामी साफ नजर आती है। फुटपाथ के आसपास पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। नतीजा यह है कि यहाँ चौबीसों घंटे पानी जमा रहता है। वाहन चालक एक तरफ तो अमानक स्पीड ब्रेकर से बचने की कोशिश करते हैं, और दूसरी तरफ फुटपाथ पर जमा पानी के कारण उन्हें कीचड़ और गंदगी से दो-चार होना पड़ता है। पानी भरे होने के कारण सड़क का किनारा दिखाई नहीं देता, जिससे गाड़ियां और ज्यादा स्लिप होती हैं।

न्यायालय के हैं कड़े निर्देश

सड़कों पर स्पीड ब्रेकरों के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के कड़े निर्देश हैं। मुख्य नियम यह है कि नेशनल व स्टेट हाईवे पर स्पीड ब्रेकर बनाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके अलावा, किसी भी अन्य सड़क पर मनमाने ढंग से या बिना अनुमति के ब्रेकर नहीं बनाए जा सकते ।

यह है नियम गति अवरोधक बनाने के

इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के नियमों के अनुसार, स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 10 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और चौड़ाई 3.7 मीटर (12 फीट) होनी चाहिए।सुरक्षा के लिए हर स्पीड ब्रेकर पर उचित चेतावनी बोर्ड लगे होने चाहिए और उस पर सफेद/पीली धारियां (इलेक्ट्रोमेटिक पेंट) पुती होनी चाहिए, ताकि रात में दूर से ही चालकों को दिखाई दे। 

गैर कानूनी अनुचित है ऐसे स्पीड ब्रेकर

भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के नियमों के अनुसार, सड़क पर एक साथ 4 या 6 स्पीड ब्रेकर बनाना गैरकानूनी और अनुचित है। नियमों के तहत दो स्पीड ब्रेकरों के बीच कम से कम 100 से 120 मीटर की दूरी होना अनिवार्य है। अंधाधुंध ब्रेकर बनाने से गंभीर दुर्घटनाएं और गाड़ियों को नुकसान हो सकता है।

शहर में स्पीड ब्रेकर नहीं स्पाइन क्रैकर

शहर में छोटी-मोटी सड़कों, गलियों, चौराहों की सड़क पर सुरक्षा के लिए बने स्पीड ब्रेकर (Speed Breaker) अक्सर खराब बनावट, अवैध ऊंचाई के कारण 'स्पाइन क्रैकर' (Spine Cracker) या 'बैक ब्रेकर' (Back Breaker) बन रहे हैं। ये कमर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर दर्द और झटके का कारण बनते हैं। 

ओमप्रकाश मिश्र, रंगकर्मी एवं सेवानिवृत प्राचार्य


चिकित्सक का कहना

डॉ. लेखराज पाटीदार

असमान स्पीड ब्रेकर (Speed Breakers) सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं हैं। तस्वीर में दिख रहा स्पीड ब्रेकर काफी उबड़-खाबड़ है और इसमें पानी भरा हुआ है। ऐसे ब्रेकर कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। रीढ़ की हड्डी और डिस्क के लिए काफी खतरनाक है। इनके मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। हर दिन ओपीडी में एक अधिक मरीज इस प्रकार के आते रहते हैं। वहीं बुजुर्ग व्यक्ति को तो फ्रेक्चर भी हो जाते हैं, ऐसे मरीज भी आ रहे हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा

ऐसे झटके गर्भवती महिलाओं और भ्रूण के लिए बहुत खतरनाक हो सकते हैं।

संभावित स्वास्थ्य जोखिमरीढ़ की हड्डी (Spine) पर असर

जब कोई वाहन अचानक ऐसे ऊंचे-नीचे ब्रेकर से गुजरता है, तो रीढ़ की हड्डी पर तेज झटका लगता है। इससे कमर दर्द (Back Pain), स्लिप डिस्क या गर्दन में दर्द (Cervical Pain) की समस्या हो सकती है।

जोड़ों में दर्द

लगातार झटके लगने से घुटनों और कूल्हों के जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है।

कुछ जरूरी सावधानियां

गति धीमी रखें: हमेशा स्पीड ब्रेकर के पास गाड़ी की रफ्तार बहुत कम कर दें। 

सही मुद्रा : बाइक या स्कूटर चलाते समय अपनी पीठ सीधी रखें और झटके के समय थोड़ा सावधान रहें। 

डॉ. लेखराज पाटीदार, एमडी, जीडी हॉस्पिटल, रतलाम

मुद्दे की बात

मुद्दे की बात यह है कि प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर इन छह-छह अमानक स्पीड ब्रेकर्स को हटाकर भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के नियमों के अनुसार केवल एक मानक स्पीड ब्रेकर बनाए, उस पर सफेद पट्टियां डाले और फुटपाथ पर जमा पानी की निकासी का तुरंत इंतजाम करे। वरना, यहाँ होने वाले किसी भी बड़े हादसे की पूरी जिम्मेदारी कलेक्टर प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी। शहर में ऐसे सैकड़ो नहीं हजारों स्पीड बेकार बने हुए हैं जो कि अमानक की स्थिति में है और आमजन को दर्द देने के अलावा और कुछ नहीं कर रहे हैं। वहां पर मानक स्पीड ब्रेकर बनाने चाहिए।