रतलाम जिले में मानसून : सोमवार को शहर में बरसात 2 इंच से अधिक पानी

रतलाम जिले में मानसून : सोमवार को शहर में बरसात 2 इंच से अधिक पानी

पिछले साल के मुकाबले अब तक आधी ही हुई बारिश

⚫ रतलाम और जावरा में सबसे ज्यादा अंतर

हरमुद्दा
​रतलाम, 7 जुलाई। जिले में इस साल मानसून की रफ्तार पिछले वर्ष की तुलना में काफी धीमी नजर आ रही है। यदि चालू मानसून सीजन (1 जून 2026 से 7 जुलाई तक) की तुलना पिछले वर्ष की इसी अवधि से की जाए, तो जिले में अब तक लगभग आधी ही बारिश दर्ज की गई है। सरकारी वर्षामापी केंद्रों से मिले आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि जिला इस समय पानी की कमी से जूझ रहा है।

रतलाम शहर में सोमवार की शाम को जिले में झमाझम बारिश देखने को मिली जो की देर रात तक चलती रही।

सोमवार की बारिश ने दी थोड़ी राहत

​हालांकि, मंगलवार सुबह 8:00 बजे समाप्त हुए पिछले 24 घंटों में जिले में मानसून ने थोड़ी करवट ली है। 7 जुलाई को जिले में 34.38 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। इसमें सबसे ज्यादा बारिश रतलाम (70 मिमी), पिपलोदा (56 मिमी) और जावरा (51 मिमी) में दर्ज की गई, जिससे उमस और गर्मी से परेशान नागरिकों को थोड़ी राहत मिली है। पिछले साल 6 जुलाई के दिन जिले में केवल 4.88 मिमी औसत बारिश ही हुई थी।

​आंकड़े बयां कर रहे हैं स्थिति

जिले में 1 जून से लेकर अब तक कुल औसत बारिश 169.75 मिमी दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिला 336.88 मिमी औसत बारिश से सराबोर हो चुका था। इसका सीधा मतलब यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक 167.13 मिमी कम बारिश हुई है, जो कि लगभग 50% की गिरावट को दर्शाता है।

​तहसीलवार आंकड़ों पर नजर 

​सैलाना और रावटी में सबसे भारी कमी

पिछले साल इस समय तक सैलाना में रिकॉर्ड 555 मिमी बारिश हो चुकी थी, जो इस साल महज 189 मिमी पर सिमट गई है। वहीं रावटी में भी पिछले साल की 483 मिमी के मुकाबले इस साल सिर्फ 104 मिमी पानी गिरा है।

​जावरा और पिपलोदा का भी यही हाल

 जावरा में पिछले साल अब तक 371 मिमी बारिश हुई थी, जो इस बार आधी से भी कम (169 मिमी) है। पिपलोदा में भी पिछले साल की 380 मिमी की तुलना में इस साल अब तक केवल 222 मिमी बारिश हुई है।

​आलोट और ताल में स्थिति स्थिर

केवल आलोट (197 मिमी) और ताल (126 मिमी) ऐसी तहसीलें हैं, जहां इस साल की बारिश पिछले साल के लगभग आसपास (क्रमशः 193 मिमी और 141 मिमी) पहुंची है।

​विशेषज्ञों का मानना

भले ही आज अच्छी बारिश दर्ज की गई है, लेकिन सीजन के कोटे को पूरा करने और खेती-किसानी की जरूरतों के लिए आने वाले दिनों में लगातार और भारी बारिश की सख्त जरूरत है। यदि मानसून ने जल्द ही रफ्तार नहीं पकड़ी, तो आने वाले दिनों में जल संकट गहरा सकता है।