शिक्षा सरोकार : 18 वर्ष विद्यापीठ का सफर ... 

शिक्षा सरोकार : 18 वर्ष विद्यापीठ का सफर ... 

19 वा स्थापना दिवस 30 जून पर विशेष 

 ⚫ सतीश त्रिपाठी 

जीवन में कुछ करना है तो मन को मारे मत बैठो।
आगे आगे बढ़ाना है तो हिम्मत हारे मत बैठो।
चलने वाला मंजिल पाता बैठा पीछे रहता है।
ठहरा पानी सड़ने लगता बहता निर्मल रहता  है।


उपरोक्त पंक्तियों जीवन के हर क्षेत्र में ऊर्जा प्रदान करती है। श्री महर्षि श्रृंग विद्यापीठ की स्थापना 30 जून 2008 को हुई थी। स्थापना के समय अनेक प्रश्न थे जिसका उत्तर आने वाले वर्षों में मिल गया, लेकिन उन उत्तरों का अर्थ सबने एक जैसा नहीं समझा। सबसे बड़ा जो प्रश्न था वह यह था कि देवस्थान न्यास यह विद्यालय निरंतर संचालित कर पाएगा या नहीं ? 18 वर्षों से विद्यालय संचालित है, लेकिन प्रश्न यथावत है। इसलिए 18 वर्ष पश्चात भी विद्यालय के विकास की वास्तविक योजना तैयार करना बाकी  है। 18 वर्ष का विद्यालय संचालन सफलता के लिए पर्याप्त है।


वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा प्रदान करने का तरीका बदला है l अब विद्यालय भवन का विस्तार होना चाहिए। ब्राह्मणों ने सदैव ज्ञान फैलाया है।  अनेक उतार-चढ़ाव के बाद भी आज विद्यालय की मशाल जल रही है तो कहीं ना कहीं विद्यालय जिस भूमि पर स्थापित है उसका चमत्कार है। आज विद्यालय अपने शीर्ष पर पहुंच चुका है। अब विकास की नितांत आवश्यकता है। इन 18 वर्षों में लगभग 1000 विद्यार्थी यहां पढ़ चुके होंगे। उसके बावजूद आज यक्ष प्रश्न यही है कि विद्यालय कभी महाविद्यालय का स्वरूप ले सकेगा   ???