लापरवाही की हद : सैलाना और बाजना क्षेत्रों से पेयजल को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाली तस्वीर आई है सामने
जल जीवन मिशन और मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा चलाई जा रही समूह पेयजल योजनाओं की जमीनी हकीकत इस बैठक में उजागर हो गई। जिस टेंडर प्रक्रिया को महीनों पहले पूरा हो जाना चाहिए था, वह अधिकारियों की सुस्ती के कारण आज भी अटकी हुई है।
⚫ रतलाम के जनजातीय क्षेत्रों में ज़हर घोल रहा फ्लोराइड युक्त पानी
⚫ डेढ़ साल से बंद पड़े प्लांट
⚫ कलेक्टर को आया गुस्सा, फटकार के बाद जागे अफ़सर
हरमुद्दा
रतलाम, 23 सितंबर। जल जीवन मिशन के बड़े-बड़े दावों के बीच रतलाम जिले के जनजातीय बहुल सैलाना और बाजना क्षेत्रों से एक गंभीर और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ सरकार हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने की बातें कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इन ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बीते डेढ़ से दो सालों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक 'फ्लोराइड युक्त पानी' पीने को मजबूर हैं।

इस गंभीर लापरवाही पर जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर अजय कटेसरिया का गुस्सा फूट पड़ा। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कलेक्टर ने कार्यपालन यंत्री को तत्काल कारण बताओ नोटिस थमा दिया है और मामले की रिपोर्ट भोपाल स्तर पर अपर मुख्य सचिव (ACS) सचिन सिंह को सौंपकर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

खबर के मुख्य बिंदु
लापरवाही की हद: सैलाना और बाजना क्षेत्र में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट (Fluoride Removal Plant) पिछले 1.5 से 2 वर्षों से पूरी तरह बंद पड़े हैं।
अफ़सरों की सुस्ती: मामला एक माह से PHE विभाग के संज्ञान में होने के बावजूद अब तक कागज़ी टेंडर प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ सका।
स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा: जनजातीय वर्ग के नागरिक लंबे समय से फ्लोराइड से दूषित पानी पीने को विवश हैं, जिससे हड्डियों और दांतों की गंभीर बीमारियों (फ्लोरोसिस) का खतरा बढ़ गया है।
कड़ा रुख: कलेक्टर ने PHE कार्यपालन यंत्री सीताराम जांगड़े को नोटिस जारी कर विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं : कलेक्टर

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन और पीएचई कार्यपालन यंत्री सीताराम जांगड़े सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
तो हुए सख्त नाराज कलेक्टर
बैठक के दौरान जब फ्लोराइड रिमूवल प्लांट की स्थिति सामने आई, तो कलेक्टर अजय कटेसरिया ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता में इस तरह की लापरवाही अक्षम्य है। उन्होंने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा: "जनजातीय क्षेत्रों में फ्लोराइड प्रभावित पानी का उपयोग करना अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। एक महीने से मामला संज्ञान में होने के बाद भी समाधान की गति धीमी होना विभाग की उदासीनता को दर्शाता है। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
कागज़ों में अटका शुद्ध पानी का सपना
जल जीवन मिशन और मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा चलाई जा रही समूह पेयजल योजनाओं की जमीनी हकीकत इस बैठक में उजागर हो गई। जिस टेंडर प्रक्रिया को महीनों पहले पूरा हो जाना चाहिए था, वह अधिकारियों की सुस्ती के कारण आज भी अटकी हुई है।
विभागीय गलियारों में खलबली
कलेक्टर के कड़े रुख और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश के बाद अब विभागीय गलियारों में खलबली मच गई है। देखना यह होगा कि इस फटकार के बाद बंद पड़े फ्लोराइड रिमूवल प्लांट कब तक शुरू हो पाते हैं और जनजातीय क्षेत्र के ग्रामीणों को कब तक इस 'धीमे ज़हर' से मुक्ति मिलती है।
Hemant Bhatt