उपलब्धि सरोकार : बांगरोद चौकी प्रभारी उप निरीक्षक विष्णुदयाल जोशी को मिलेगा “केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक — 2026”
⚫ पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया
⚫ सम्मान अत्यंत गौरवशाली
हरमुद्दा
रतलाम, 1 नवंबर। पुलिस ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली और पेशेवर दक्षता से पूरे प्रदेश में मान बढ़ाया है। गंभीर अपराधों में त्वरित विवेचना, पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन और न्यायालय में प्रभावी पैरवी के दम पर अपराधियों को सजा दिलाने वाले बांगरोद चौकी प्रभारी (थाना नामली) उप निरीक्षक विष्णुदयाल जोशी को प्रतिष्ठित “केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक वर्ष 2026” से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।

यह गर्व का विषय है कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस वर्ष की सूची में मध्यप्रदेश से केवल पांच पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनमें रतलाम के उप निरीक्षक श्री जोशी भी एक हैं। यह उपलब्धि पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के कुशल मार्गदर्शन और रतलाम पुलिस की संपूर्ण टीम की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
पदक प्राप्त अधिकारी का संक्षिप्त परिचय
नाम / पद: विष्णुदयाल जोशी (वी.डी. जोशी), उप निरीक्षक
वर्तमान पदस्थापना: चौकी प्रभारी बांगरोद, थाना नामली, जिला रतलाम।
जिन मामलों में मिला यह गौरव, उनका विवरण
उप निरीक्षक श्री जोशी की वैज्ञानिक दृष्टिकोण और गहराई से की गई जांच के आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा निम्नलिखित गंभीर मामलों में अपराधियों को कठोर सजा दिलाई जा चुकी है।
प्रकरण 1 (थाना दीनदयाल नगर, अप.क्र. 105/2020 - धारा 302, 201 भादवि):
नाले में मिली एक महिला (धनकीबाई) की लाश के मामले में पति रमेश बिलवाल पर शंका थी। श्री जोशी ने आरोपी के नाखून सुरक्षित कर फॉरेंसिक लैब भेजे, जहां नाखूनों में मृतिका का DNA पाया गया। इस अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने 29 अगस्त 2025 को आरोपी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
प्रकरण 2 (थाना दीनदयाल नगर, अप.क्र. 139/2020 - धारा 307, 294, 34 व 302 भादवि):
विवाह समारोह में मामूली विवाद पर पवन उर्फ पोपट की हत्या के इस मामले में, कुछ साक्षियों के पक्षद्रोही होने के बावजूद FSL और DNA रिपोर्ट (आरोपी की टी-शर्ट पर मृतक का रक्त व DNA मिलना) के मजबूत आधार पर माननीय न्यायालय ने 12 नवंबर 2025 को मुख्य आरोपी राहुल डिंडोर को सश्रम आजीवन कारावास तथा अन्य आरोपी को सजा दिलाई।
प्रकरण 3 (थाना औद्योगिक क्षेत्र रतलाम, अप.क्र. 806/2024 - धारा 103(1), 238, 3(5) बीएनएस):
चोरी की शंका में बेरहमी से की गई मारपीट में मणिलाल मईड़ा की हत्या के मामले में सीसीटीवी फुटेज, लाठियों पर मानव त्वचा के अंश की FSL रिपोर्ट और बीएनएसएस की धारा 105 के तहत वीडियोग्राफी आधारित जप्ती जैसी तकनीकी व वैज्ञानिक कार्यप्रणाली अपनाई गई। परिणामस्वरुप, घटना के एक वर्ष के भीतर ही 23 सितंबर 2025 को न्यायालय ने सातों आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
उत्कृष्ट विवेचना के प्रमुख आधार
वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्य: FSL रिपोर्ट, नाखून और कपड़ों से प्राप्त DNA मिलान, तथा सुजलॉन कंपनी के CCTV फुटेज का प्रभावी उपयोग।
पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत आलाजरब की वीडियोग्राफी के साथ जब्ती।
मजबूत अभियोजन पैरवी: साक्ष्यों का सुव्यवस्थित संकलन कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना।
सम्मान अत्यंत गौरवशाली
यह उपलब्धि दर्शाती है कि जब पुलिस अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों और तकनीकी साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जाती है, तब अपराधियों का बचना नामुमकिन हो जाता है और पीड़ित पक्षों को वास्तविक न्याय मिलता है। रतलाम पुलिस परिवार के लिए यह सम्मान अत्यंत गौरवशाली है।
Hemant Bhatt