जनगणना : दिया आधा अधूरा ज्ञान, कह दिया फतह करो रतलाम का मैदान
⚫ जिस ऐप पर काम करना है उसका ना प्रशिक्षण दिया और न जानकारी
⚫ बुकलेट को डिजिटल के रूप में सुना दिया मौजूद कर्मचारी
⚫ 5 दिन बाद किट दी वह भी आधी अधूरी
हरमुद्दा
रतलाम, 7 मई। शहर में 1 मई से जनगणना का कार्य शुरू हो गया है। प्रारंभिक चरण में मकान की लिस्टिंग हो रही है। खास बात तो यह है कि प्रशिक्षण के दौरान आधा अधूरा ज्ञान देकर सबको कह दिया कि मैदान फतह करो। कार्य डिजिटल करना है मगर इसका प्रशिक्षण नहीं दिया गया। किट भी 5 दिन बाद दी गई वह भी आधी अधूरी।

मुद्दे की बात तो यह जनगणना 2027 के प्रशिक्षण में मुख्य रूप से डिजिटल माध्यम (मोबाइल ऐप/पोर्टल) के उपयोग, मकान सूचीकरण (Houselisting), और 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) की प्रक्रिया को समझाना सबसे महत्वपूर्ण था।
मोबाइल एप और पोर्टल का तकनीकी ज्ञान दिया ही नहीं।
शहर के लिए प्रशिक्षण लेने वालों ने हरमुद्दा से चर्चा में बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बुकलेट को डिजिटल के रूप में सुना कर प्रशिक्षण की इतिश्री कर दी। मोबाइल एप और पोर्टल का तकनीकी ज्ञान दिया ही नहीं। मोबाइल एप और पोर्टल का उपयोग कैसे किया जाना है। यह प्रशिक्षण के दौरान नहीं बताया गया। प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण कार्य तो डिजिटल जनगणना ही है।

जबकि होना है यह
यह पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है, इसलिए डेटा प्रविष्टि (data entry) की तकनीकी बारीकियों का ज्ञान अनिवार्य है। प्रशिक्षण में शामिल मुख्य बिंदु:डिजिटल/मोबाइल ऐप प्रशिक्षण: जनगणना के लिए उपयोग होने वाले मोबाइल एप्लीकेशन और सीएमएमएस (CMMS) पोर्टल का संचालन, डेटा सिंकिंग (Data Syncing), और लॉग-इन प्रक्रिया। मकान सूचीकरण (Houselisting): परिसर (Premises) और भवन की अवधारणा, मकानों की नंबरिंग, और मकान सूचीकरण व आवास अनुसूची के तहत जानकारी एकत्र करना।स्व-गणना (Self-Enumeration): मोबाइल ऐप के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जनगणना जानकारी कैसे भर सकते हैं, इसके बारे में प्रगणकों को प्रैक्टिकल रूप में प्रशिक्षण देना था। रतलाम नगर के लिए वह नहीं हुआ। मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने का कह दिया, बस।
कन्फ्यूजन वाला प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान बताए गए कि मकान के नंबरिंग के दौरान 001 से शुरू किया जाए। 001 इसलिए की एक प्रगणक के कार्य क्षेत्र में लगभग डेढ़ सौ से 200 मकान आने हैं। इसलिए तीन अंको को बताया गया। जबकि एप में स्पष्ट लिखा है कि नगर निगम द्वारा मकान की जो नंबरिंग की गई है, वह दर्ज करें। तो फिर 001 या अन्य नंबर बताकर कंफ्यूज क्यों किया गया?
किट देने में भी विलंब

यूं देखा जाए तो 1 मई से ही घर-घर जाकर प्रगणना मकान को सूचीकरण कर रहे हैं, मगर उनके पास जनगणना की किट नहीं है। कई जगह 5 मई को और कई जगह तो 6 मई को किट दी गई है और वह भी आधी अधूरी। ना तो उसमें ओआरएस के घोल है ना पेरासिटामोल है।
Hemant Bhatt