दधीचि परंपरा का निर्वहन: 88 वर्षीय शरद चंद्र कानडे ने गणेश चतुर्थी पर मेडिकल कॉलेज को देह समर्पित की
⚫ गार्ड ऑफ़ ऑनर देकर किया सम्मान
⚫राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत जीवन और सेवा का संकल्प
⚫ समाज और प्रशासन ने दी श्रद्धांजलि
हरमुद्दा
रतलाम, 14 सितंबर। "जीते जी समाज सेवा और मृत्यु के बाद भी मानव कल्याण"—इसी महान विचार को चरितार्थ करते हुए रतलाम के 88 वर्षीय समाजसेवी शरद चंद्र लक्ष्मण राव कानडे की देह उनकी अंतिम इच्छानुसार गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर शासकीय डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडेय मेडिकल कॉलेज को सौंप दी गई। महर्षि दधीचि के अमूल्य त्याग से प्रेरणा लेते हुए किए गए इस पुनीत कार्य में उनकी जीवन संगिनी श्रीमती निर्मला कानडे एवं संपूर्ण परिवार का पूर्ण सहयोग रहा।

देहदान से पूर्व मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा दिवंगत कानडे जी को उनके निवास स्थान पर गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात् सनसिटी से निकली अंतिम यात्रा मेडिकल कॉलेज पहुँची, जहाँ प्रभारी डीन डॉ. जगदीश चंद्र हुंडेकरी एवं मानव संरचना विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंगरौले सहित अन्य चिकित्सा अधिकारियों ने भावी डॉक्टरों के अध्ययन एवं शोध के लिए पार्थिव देह को पूर्ण सम्मान के साथ स्वीकार किया।
राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत जीवन और सेवा का संकल्प
7 दिसंबर 1937 को उज्जैन में जन्मे और नीमच में शिक्षा प्राप्त करने वाले शरद चंद्र कानडे का पूरा जीवन राष्ट्रप्रेम और निष्ठा का प्रतीक रहा।
देश सेवा का जज्बा: भारत-चीन और भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने घर-घर जाकर सेना के सहयोग के लिए धनराशि एकत्रित की थी।
अनुशासित कार्यशैली: वर्ष 1960 से रतलाम जिला शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएँ देने वाले कानडे जी अपनी ईमानदारी और समयबद्धता के लिए जाने जाते थे।
देहदान का अडिग संकल्प: 15 वर्ष पूर्व जब रतलाम में मेडिकल कॉलेज नहीं था, तब उन्होंने इंदौर जाकर संकल्प-पत्र भरा था। बाद में रतलाम में मेडिकल कॉलेज बनते ही समाजसेवी गोविंद काकानी के माध्यम से यहाँ अपना पंजीयन कराया।
संस्कार और आध्यात्म: स्वामी सत्यमित्रानंद जी गिरी से दीक्षित कानडे जी ने हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर में भी लंबी सेवाएँ दीं।
समाज और प्रशासन ने दी अंतिम श्रद्धांजलि
निधन की सूचना मिलते ही समाजसेवी गोविंद काकानी एवं प्रशासन ने त्वरित तैयारियाँ पूरी कीं। अंतिम विदाई के समय समन्वय परिवार, काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, प्रभु प्रेमी संघ, महाराष्ट्र समाज, नेत्रम संस्था, शिक्षा जगत, पुलिस एवं जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों ने गायत्री मंत्रोच्चार के साथ पुष्पांजलि अर्पित कर इस महान आत्मा को नमन किया। उनका यह योगदान चिकित्सा जगत के अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए सदैव एक अमूल्य धरोहर बना रहेगा।
Hemant Bhatt