ईद-मिलाद-उन-नबी पर रतलाम की सड़कों पर जश्न या 'शक्ति प्रदर्शन'
⚫ 118 dB डीजे, हुड़दंग और पार्षद की मौत ने प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
⚫ उज्जैन कमिश्नर और आईजी से सख्त कार्रवाई की मांग
हरमुद्दा
रतलाम। उत्सव की आड़ में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाना और सड़कों को बंधक बना लेना अब शहर के लिए एक आम बात बनती जा रही है। बुधवार को ईद-मिलाद-उन-नबी के मौके पर रतलाम की सड़कों पर जो नजारा देखने को मिला, उसने आम नागरिकों के मन में खौफ और आक्रोश भर दिया है। 118 डेसिबल के कानफोड़ू साउंड, सड़कों पर हुड़दंग और प्रशासन की लाचारी का नतीजा यह रहा कि एक जनप्रतिनिधि (पार्षद) की जान चली गई।

शहर की जागरूक जनता और पीड़ित परिवार का साफ आरोप है कि यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि 'गैर-इरादतन हत्या' है। जनता पूछ रही है—क्या यह किसी धार्मिक उत्सव की खुशी थी या फिर शहर को सहमाने के लिए शक्ति प्रदर्शन?
118 डेसिबल का 'साउंड अटैक' और प्रशासन की नाकामी
उच्चतम न्यायालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए जुलूस में 118 डेसिबल तक डीजे और साउंड सिस्टम बजाए गए।

मानक सीमा से कई गुना तेज इस शोर ने बुजुर्गों, मरीजों और बच्चों का जीना दुश्वार कर दिया। जिस पुलिस और प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन कराना चाहिए था, वह मूकदर्शक बनी खड़ी रही। शहर की जनता का कहना है कि पुलिस प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम में पूरी तरह नकारा साबित हुआ है।
पार्षद की मौत: हादसा या प्रशासनिक लापरवाही से हुई हत्या?

इस पूरे हुड़दंग और डीजे के अत्यधिक शोर व अफरा-तफरी के बीच पार्षद की असमय मौत ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय पर वाहन निकल पाता या डीजे के शोर व भीड़ पर नियंत्रण होता, तो यह जान बचाई जा सकती थी। लोग इसे 'हादसा' मानने को तैयार नहीं हैं, बल्कि इसे सीधे तौर पर व्यवस्था द्वारा की गई 'हत्या' करार दे रहे हैं।
मुख्य मुद्दे और उठते सुलगते सवाल
वोट बैंक की राजनीति: क्या वोट बैंक की खातिर जिला प्रशासन ने शहर को हुड़दंगियों के हवाले कर दिया?

नियमों की अवहेलना: जब डीजे की साउंड लिमिट तय है, तो 117 डेसिबल तक साउंड ले जाने की अनुमति किसने दी?
जवाबदेही किसकी?: क्या उज्जैन कमिश्नर और आईजी स्तर के अधिकारी इस पूरे मामले का संज्ञान लेंगे?
उज्जैन कमिश्नर और आईजी से सख्त कार्रवाई की मांग
रतलाम की परेशान जनता और आक्रोशित नागरिकों ने मांग की है कि मामले को ठंडे बस्ते में न डाला जाए। उज्जैन संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (IG) और संभागायुक्त (Commissioner) स्वयं इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच करें।
आयोजकों, डीजे संचालकों और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में त्योहार की आड़ में कोई भी शहर की शांति से खिलवाड़ न कर सके।
Hemant Bhatt