रतलाम में ₹17 लाख के बैंक फर्जीवाड़, पिता को सजा, बेटी फरार
⚫ कूटरचित दस्तावेजों से लोन लेने वाले आरोपी जाकिर हुसैन को 7 साल की कड़ी सजा
हरमुद्दा
रतलाम, 25 अगस्त। फर्जी फर्म बनाकर और कूटरचित (जाली) दस्तावेजों के जरिए बैंक से ₹17 लाख का लोन हड़पने के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी जाकिर हुसैन को धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी भा.दं.सं. के तहत दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹16,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पैरवी अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने की।

अपराध का तरीका: अस्तित्वहीन फर्म और जाली कोटेशन
योजना: आरोपी जाकिर हुसैन (55 वर्ष, निवासी PNT कॉलोनी, रतलाम) ने अपनी फरार पुत्री/सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के तहत दौना-पत्तल निर्माण इकाई के नाम पर ₹25 लाख के लोन का आवेदन दिया था।
स्वीकृति बैंक ने प्रक्रिया पूरी करने के बाद ₹17 लाख का ऋण स्वीकृत किया।
फर्जीवाड़ा मशीनरी खरीदने के लिए "निक्की ट्रेडर्स, सांवेर रोड, इंदौर" के नाम का कोटेशन जमा किया गया। जांच में पाया गया कि इस पते पर निक्की ट्रेडर्स नाम की कोई फर्म थी ही नहीं।
खाते का दुरुपयोग: आरोपी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (रेलवे कॉलोनी शाखा, रतलाम) में निक्की ट्रेडर्स का खाता खुद को प्रोपराइटर बताकर खुलवाया और लोन के ₹17 लाख उसी में ट्रांसफर करवाकर राशि का गलत इस्तेमाल किया।
अदालत का फैसला और सजा का ब्योरा
अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान द्वारा प्रस्तुत बैंक दस्तावेजों, जब्ती पन्नों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अपराध को साबित माना।

प्रकरण का संक्षिप्त परिणाम
⚫ न्यायालय: द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, रतलाम
⚫ सत्र प्रकरण: 55/2021
⚫ FIR: अपराध क्रमांक 361/2020, थाना माणक चौक, जिला रतलाम
⚫ अपराध: धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी भा.दं.सं.
⚫ मुख्य आरोपी: जाकिर हुसैन
⚫ सह-आरोपी: ऐहतेशाम बानो — फरार
⚫ धोखाधड़ी से प्राप्त ऋण: ₹17,00,000/-
⚫ दोषसिद्धि: धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी भा.दं.सं.
⚫ सजा: 5 वर्ष, 7 वर्ष, 5 वर्ष, 7 वर्ष एवं 5 वर्ष सश्रम कारावास क्रमशः
⚫ अर्थदंड: कुल ₹16,000/-
सजाएं: सभी मूल कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
Hemant Bhatt