आंखों देखी : रतलाम जिला विकास समिति बैठक से प्रभारी मंत्री ने रखा मीडिया को दूर

​मीडिया को बैठक से बाहर रखकर आखिर क्या छिपाने की कोशिश की गई? जनप्रतिनिधियों का अपमान, प्रोटोकॉल का उल्लंघन और अन्न की बर्बादी यह साबित करती है कि जिला प्रशासन और जिम्मेदार तंत्र में जवाबदेही और संवेदनशीलता की भारी कमी है। सरकारी खजाने पर पलीता लगाने वाले इस रवैये को लेकर अब स्थानीय स्तर पर गहरा आक्रोश है।

आंखों देखी : रतलाम जिला विकास समिति बैठक से प्रभारी मंत्री ने रखा मीडिया को दूर

⚫ अन्न की बर्बादी और प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन 

⚫ वीआईपी कल्चर में पिसे संस्कार

⚫ सांसद की गाड़ी धूप में, कलेक्टर एसपी की शेड में

हरमुद्दा
​रतलाम, 30 सितंबर। कलेक्ट्रेट सभागार में जिला विकास एवं सलाहकार समिति की बैठक विकास के मुद्दों से ज्यादा अपनी बदइंतजामी, प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अन्न के अनादर को लेकर चर्चा में आ गई है। प्रदेश के जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह की मौजूदगी एवं रतलाम-झाबुआ सांसद अनीता नागर सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जनसमस्याओं के समाधान से अधिक व्यवस्थाओं की खामियां उजागर हुईं।

अपने बयानों और कार्यशैली को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले प्रभारी मंत्री कुँवर विजय शाह ने दोपहर 12 बजे शुरू हुई इस दो घंटे की बैठक से मीडिया को पूरी तरह दूर रखा। बैठक में क्या निर्णय हुए, यह तो अंदर ही सिमट कर रह गए, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, वे बेहद शर्मनाक और प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाती हैं।

​ नाश्ता डस्टबिन के हवाले, अन्न का घोर अनादर

​ नाश्ता ऐसे टेबल पर छोड़कर चलते बने अधिकारी

बैठक में मौजूद लगभग 200 जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष दोपहर 12:30 बजे कचोरी, खमण सहित लजीज नाश्ता परोसा गया था। बैठक समाप्त होने के बाद टेबल पर छोड़ी गई प्लेटों का दृश्य दिल को झकझोर देने वाला था। अधिकांश प्लेटों में खाद्य सामग्री वैसी की वैसी पड़ी थी—किसी में से एक बाइट ली गई थी, तो कई प्लेटें छुई तक नहीं गईं।

उनको खटकी बर्बादी जो थे संवेदनशील

​जब दोपहर 12 बजे की बैठक तय थी, तो जाहिर है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपने घर से भोजन करके ही आए थे। इसके बावजूद सरकारी खजाने से इस फिजूलखर्ची और तामझाम की क्या आवश्यकता थी? 5 मिनट का समय निकालकर नाश्ता करने की जहमत तक किसी ने नहीं उठाई। अन्न का यह अनादर और सरकारी धन की बर्बादी वहां मौजूद संवेदनशील लोगों को खटकती रही। इसके अलावा, स्वागत के लिए उपयोग किए गए महंगे पुष्पगुच्छ (बुके) भी फोटो खिंचवाने के बाद वहीं कचरे की तरह तिरस्कृत पड़े मिले।

​प्रोटोकॉल की धज्जियां

जनप्रतिनिधियों का अनादर

​ दूसरी पंक्ति में बिठाया रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को

बैठक में प्रशासनिक स्तर पर प्रोटोकॉल का भारी उल्लंघन देखने को मिला। किसे कहां बैठाया जाना है, इसकी कोई ठोस रूपरेखा तय नहीं थी। रतलाम विकास प्राधिकरण (RDA) के अध्यक्ष मनोहर पोरवाल और उपाध्यक्ष गोविंद काकानी जैसे वरिष्ठ पदों पर आसीन नेताओं को दूसरी पंक्ति में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व महापौर के साथ बैठा दिया गया, जबकि अग्रिम पंक्ति में चाटुकारिता करने वाले चेहरा चमकाते नजर आए।

सांसद की गाड़ी धूप में, कलेक्टर एसपी की शेड में

​प्रशासनिक मनमानी का आलम यह था कि प्रभारी मंत्री का काफिला आने पर उनकी गाड़ी शेड के नीचे रुकी, जिसके ठीक बगल में कलेक्टर और एसपी की गाड़ियां पार्क की गईं। वहीं, बैठक की अध्यक्षता कर रही क्षेत्रीय सांसद अनीता नागर सिंह चौहान की गाड़ी को चिलचिलाती धूप में खड़ा रखा गया। प्रोटोकॉल के नियमानुसार प्रभारी मंत्री के बाद सांसद का वाहन शेड में होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों को अपनी गाड़ियां धूप से बचाने की चिंता अधिक थी।

​प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

​मीडिया को बैठक से बाहर रखकर आखिर क्या छिपाने की कोशिश की गई? जनप्रतिनिधियों का अपमान, प्रोटोकॉल का उल्लंघन और अन्न की बर्बादी यह साबित करती है कि जिला प्रशासन और जिम्मेदार तंत्र में जवाबदेही और संवेदनशीलता की भारी कमी है। सरकारी खजाने पर पलीता लगाने वाले इस रवैये को लेकर अब स्थानीय स्तर पर गहरा आक्रोश है।