सेहत सरोकार : 'एक बूंद जिंदगी की', भ्रांतियां तोड़कर स्वैच्छिक रक्तदान को बनाएं जीवन का हिस्सा

सेहत सरोकार : 'एक बूंद जिंदगी की', भ्रांतियां तोड़कर स्वैच्छिक रक्तदान को बनाएं जीवन का हिस्सा

⚫ रतलाम की साख आज इस क्षेत्र में इतनी मजबूत, 8 जिले लाभान्वित

⚫ मानव सेवा समिति और हजारों निष्ठावान स्वैच्छिक रक्तदाताओं का अमूल्य योगदान

हरमुद्दा
​रतलाम, 30 सितंबर। किसी समय दुर्घटना का शिकार व्यक्ति हो, प्रसव पीड़ा से जूझती महिला या थैलेसीमिया पीड़ित मासूम बच्चा—रक्त की एक यूनिट के लिए परिजनों को दर-दर भटकना पड़ता था। लेकिन जागरूकता की लहर ने अब इस तस्वीर को बदल दिया है। प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस का सीधा प्रभाव आज धरातल पर दिखाई दे रहा है।

​रतलाम की साख आज इस क्षेत्र में इतनी मजबूत हो चुकी है कि आसपास के सात से आठ जिलों के मरीज और परिजन यहां इलाज व रक्त उपलब्धता के लिए आना प्राथमिकता समझते हैं। यहां उन्हें पूर्णतः जांचा-परखा और सुरक्षित रक्त आसानी से मिल जाता है। प्रदेश स्तर पर इस मानवीय पहल को मुकाम तक पहुंचाने में मानव सेवा समिति और हजारों निष्ठावान स्वैच्छिक रक्तदाताओं का अमूल्य योगदान रहा है।

​क्यों अनिवार्य है स्वैच्छिक रक्तदान?

⚫ ​कोई कृत्रिम विकल्प नहीं: वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद मानव रक्त का कोई पूर्ण कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है। अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इसकी मांग निरंतर बनी रहती है।

⚫ ​आपातकाल में जीवनरक्षक: दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों में समय पर रक्त की उपलब्धता ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है।

⚫ ​थैलेसीमिया पीड़ितों का सहारा: थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को जीवनभर नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान उनके लिए संजीवनी साबित होता है।

​भ्रांतियां दूर करें: 105 बार रक्तदान करने वाले की जुबानी

​ समाजसेवी रक्तदाता गोविंद काकानी

समाज में आज भी रक्तदान को लेकर कमजोरी आने या स्वास्थ्य बिगड़ने जैसी भ्रांतियां व्याप्त हैं। 105 बार रक्तदान कर चुके वरिष्ठ रक्तदाता गोविंद काकानी का अनुभव इन भ्रांतियों को खारिज करता है—
​"105 बार रक्तदान करने के बाद भी मुझे कभी किसी प्रकार की शारीरिक कमजोरी महसूस नहीं हुई। रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित चिकित्सकीय मानकों और स्वास्थ्य जांच के बाद ही कराया जाता है। इसलिए बिना किसी डर के स्वस्थ व्यक्तियों को आगे आना चाहिए।"

बड़े होकर हम भी करेंगे रक्तदान यही भावना बच्चों की

⚫ ​युवाओं से आह्वान: खास मौकों को बनाएं 'रक्तदान दिवस' राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है।

⚫ ​विशेष अवसरों को जोड़ें: युवा अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या अन्य यादगार अवसरों पर रक्तदान करने का संकल्प लें।

⚫ ​जागरूकता के वाहक बनें: स्वयं रक्तदान करने के साथ-साथ अपने मित्रों, परिवार और समाज को इसके प्रति प्रेरित करें।

​हमारा संकल्प

​रक्तदान किसी एक व्यक्ति का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। आपकी एक छोटी सी पहल किसी परिवार की सबसे बड़ी चिंता को दूर कर सकती है। आइए, इस राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर संकल्प लें कि भ्रांतियों को मिटाएंगे और जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाएंगे।

​"रक्तदान करें — जीवन बचाने की मुहिम से जुड़ें।"