मप्र में कोचिंग सेंटरों के लिए नया सख्त नियम लागू, 50 से अधिक छात्रों वाले केंद्रों का पंजीयन अनिवार्य
सर्वोच्च न्यायालय ने देश, प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के मामले में कुछ चिंता जाहिर करते हुए राज्य सरकारों को कोचिंग सेंटरों की व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने के संबंध में जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर अब शासन ने ये आदेश जारी किए हैं।
⚫ वीरेन्द्र त्रिवेदी/कैलाश परिहार
रतलाम, 30 अक्टूबर। प्रदेश के सभी कोचिंग सेंटर अब उच्च शिक्षा विभाग के अधीन रहेंगे। कोचिंग सेंटरों के बच्चों की सुरक्षा और अन्य कारणों से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शासन ने ये आदेश हाल ही में जारी किए हैं। बाकायदा कोचिंग सेंटर अपना पंजीयन भी कराएंगे और शासन के निर्देशों का पालन भी करेंगे। प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर अब कोचिंग सेंटरों पर भी नकेल कसी रहेगी।
पंजीयन अनिवार्य
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा ने 28 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा कि प्रत्येक ऐसी कोचिंग जिसमें विद्यार्थियों की संख्या 50 या इससे अधिक हो उसका पंजीयन अनिवार्य रहेगा।ऑनलाइन पंजीयन होंगे।एक से अधिक शाखा होने की स्थिति में सभी के अलग अलग पंजीयन होंगे। यह आदेश 28 अक्टूबर से संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू हो गए है। एक बार किया गया पंजीयन तीन साल के लिए वैध होगा।तीन साल बाद फिर पंजीयन कराना होगा।
ये होंगे पंजीयन अधिकारी
नगर निगम क्षेत्र में निगमायुक्त,नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्र में मुख्य नगर पालिका अधिकारी,और ग्रामीण क्षेत्र की कोचिंग के लिए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंजीयन अधिकारी होंगे। कोचिंग सेंटर की वेबसाइट पर बच्चों की सुरक्षा इंतजाम,सेंटर के शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता,बीते वर्षों के सेंटर के विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम,शुल्क संरचना, फीस वापसी और विकास नीति, हेल्प लाइन नंबर तथा अनुपालन घोषणा का प्रदर्शन अनिवार्य होगा।गलत जानकारी होने पर पंजीयन अधिकारी पंजीयन निरस्त कर सकेंगे।
विद्यार्थी संरक्षण मापदंड
आदेश के अनुसार विद्यार्थियों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, छात्र छात्राओं के अलग प्रसाधन, पेयजल की उचित व्यवस्था, सीसी टीवी कैमरों से निगरानी व्यवस्था अग्निशमन व्यवस्था, प्राथमिक उपचार व्यवस्था, अभिभावकों की समय समय पर बैठक, आपातकालीन हेल्प लाईन नंबर का प्रदर्शन ये सब अनिवार्य होगा। साथ ही सेंटर में किसी भी विद्यार्थी द्वारा आत्महत्या या आत्महत्या के प्रयास की यदि कोई घटना घटती हैं तो 24 घंटे के अंदर ये सोचना जिला निगरानी समिति को अनिवार्य रूप से देने के लिए भी सेंटर प्रबन्धन को पाबन्द किया गया हैं। ऐसे विद्यार्थी की गोपनीयता और पहचान संबंधी संरक्षण के पुख्ता उपाय भी करना होंगे।
शिकायत निवारण तंत्र भी विकसित करे
आदेश के अनुसार प्रत्येक सेंटर पर शिकायत पेटी और सुझाव पेटी अनिवार्यतः रखे। शिकायत का समय सीमा 30 दिन में निराकरण करे। कोचिंग स्तर पर शिकायत का उचित निराकरण न होने पर संबंधित अधिकारी को शिकायत विद्यार्थी कर सकते हैं। जांच में शिकायत होने पर उचित कार्यवाही होगी।
इसलिए हुआ ये
दरअसल बीते दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने देश, प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के मामले में कुछ चिंता जाहिर करते हुए राज्य सरकारों को कोचिंग सेंटरों की व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने के संबंध में जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर अब शासन ने ये आदेश जारी किए हैं।
Hemant Bhatt