मेरी नजर से : गुजराती कॉलेज एलुमनी ने नाचते-गाते कृष्ण जन्मभूमि के किए दर्शन, रहन सहन और कृष्ण की बाल लीलाओं को जाना और समझा

मेरी नजर से : गुजराती कॉलेज एलुमनी ने नाचते-गाते कृष्ण जन्मभूमि के किए दर्शन, रहन सहन और कृष्ण की बाल लीलाओं को जाना और समझा

गोकुल की गलियों को किया नमन, कृष्ण लीला भूमि पर किया रेत ​रमण  

प्रवीण नागदिवे
इन्दौर, 16 जुलाई। भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जानने समझने निकले। गोकुल की गलियों में भ्रमण करते हुए वहॉं के निवासियों से वहॉं के रहन सहन और कृष्ण की बाल लीलाओं को जाना और समझा। सांस्कृतिक ​दृष्टि से भी इसका बहुत महत्व रहा। 

गुजराती आर्टस् एण्ड लॉ कॉलेज एलुमनी ग्रुप के संयोजक प्रवीण नागदिवे ने बताया कि 31 सदस्यीय दल के साथ कृष्ण जन्मभूमि, वृन्दावन, बरसाना, गोवर्धन परिक्रमा, नन्दगांव, प्रेम मन्दिर, बांके बिहारी मंदिर के दर्शन एलुमनी ग्रुप ने किये । जहॉं ये यात्रा धार्मिक रही, वहीं सांस्कृतिक ​दृष्टि से भी इसका बहुत महत्व रहा। 

... और सदस्य हो गए कृष्णमय

एलुमनी सदस्यों ने गोकुल की गलियों में भ्रमण करते हुए वहॉं के निवासियों से वहॉं के रहन सहन और कृष्ण की बाल लीलाओं को जाना और समझा । कृष्ण जन्मभूमि में कारागार में जन्मे स्थल के दर्शन कर एलुमनी सदस्य कृष्णमय हो गए। एलुमनी सदस्य जहॉं भी गए ढोल मंजीरे बजाते गए और सभी दर्शनार्थियों के आकर्षण का केन्द्र भी बने रहे। पुलिस प्रशासन ने भी मंदिर में भजन गाने और उन पर नाचने के लिए एलुमनी सदस्यों को भरपूर सहयोग किया।

जब किन्नर दल हुआ कृष्ण प्रेम में विह्वल

बरसाना में राधा जी के दर्शन करने पहुंचे एलुमनी सदस्यों की राधे राधे की गूंज सुन वहॉं दर्शन् के लिए पहुंचे किन्नरों के दल ने कृष्ण प्रेम में विह्वल होकर जी भर कर नृत्य किया। उनके साथ एलुमनी सदस्य भी जम कर झूमे। 

रेती में लौट लगाकर हो जाते हैं व्याधियों से मुक्त

यात्रा के अंतिम पड़ाव में सदस्य रेती रमण् क्षेत्र पंहुचे जहॉं एलुमनी के पंडित अंशुमान व्यास ने बताया कि रमण रेती को भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाओं का स्थान माना जाता है, जहां वे अपने दोस्तों के साथ खेलते थे। यहां संत रसखान ने तपस्या की थी और उनकी समाधि भी है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने यहां एक सिद्ध संत आत्मानंद गिरि को साक्षात दर्शन दिए थे, इसलिए यह स्थान सिद्ध स्थान माना जाता है। यहां की रेत को पवित्र माना जाता है और भक्तगण रेत में लोटकर भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और विभिन्न शारीरिक व्याधियों ने मुक्त हो जाते है। दल के सदस्यों ने भी रमण रेती में रमण किया और पूजन कर कृष्ण की आराधना की।

यह सब रहे साथी यात्रा के

इस धार्मिक सांस्कृतिक यात्रा में प्रमुख रूप से सुशील वर्मा, कमल वर्मा, सुनीता शर्मा, उन्नति जैन, मनीषा छापरवाल, सारिका सिंह, सुदर्शना पन्डोले, राकेश अहिरवार, हेमलता अहिरवार, प्रतिभा बघेल,अर्चना बघेल, गोपाल बोरासी, प्रमिला बोरासी, शीला कैथवास, रूपेश यादव, शैलेंद्र बघेल, अंशुमान व्यास, जया महाडिक, सुनील गुप्ता, मीना गुप्ता, प्रवीण नागदिवे, मनीषा नागदिवे, जीतेंद्र खरे, स्वाती मोहिते, रोहित पटोरिया, सागरिका महाडिक, भारती शर्मा, अर्चना वैद्य, संस्कृति जैन, हेंसी भण्डारी, वुसअत बहार आदि शामिल हुए।

जाएंगे अन्य स्थलों की भी ओर

भारत ऐतिहासिक सांस्कृतिक दर्शन की कड़ी में एलुमनी सदस्य शीघ्र ही भारत के अन्य दर्शनीय स्थलों की ओर जाएंगे।