कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई: धामनोद नगर परिषद उपाध्यक्ष लोकेन्द्रसिंह सिसोदिया पार्षद पद से बर्खास्त
⚫ पद का दुरुपयोग और टेंडर में संलिप्तता के दोषी
⚫ प्रशासनिक गलियारे और राजनीतिक हलकों में उस वक्त हड़कंप
हरमुद्दा
रतलाम, 29 सितंबर। प्रशासनिक गलियारे और राजनीतिक हलकों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कलेक्टर अजय कटेसरिया ने नगर परिषद धामनोद के उपाध्यक्ष एवं भाजपा पार्षद लोकेन्द्रसिंह सिसोदिया को पद का दुरुपयोग करने के गंभीर मामले में पद से पृथक कर दिया।

कलेक्टर अजय कटेसरिया
कलेक्टर ने यह दंडात्मक कार्रवाई मध्य प्रदेश नगरपालिक अधिनियम 1961 की धारा 41 (1) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए 28 सितंबर को जारी अपने आदेश में की है। यह पूरी प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के आदेशों के अनुपालन में जनसुनवाई के दौरान प्राप्त शिकायत की जांच के बाद अमल में लाई गई है। शिकायतकर्ता माणकलाल डिंडोर की ओर से प्रकरण में पैरवी अभिभाषक कपिल मजावदिया एवं रोहित शर्मा ने की

अभिभाषक कपिल मजावदिया
पारिवारिक फर्म के नाम पर बिल भुनाने और टेंडर में संलिप्तता का आरोप सिद्ध
अभिभाषक श्री मजावदिया ने हरमुद्दा को बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि लोकेन्द्रसिंह सिसोदिया (पिता चतरसिंह) ने अपने पार्षद व उपाध्यक्ष पद के प्रभाव का अनुचित इस्तेमाल करते हुए अपने परिवार के नाम से संचालित 'सिसोदिया टेंट हाउस एवं लाईट डेकोरेशन' (बस स्टेशन, धामनोद) के नाम पर नगर परिषद से शासकीय राशि के बिलों का भुगतान प्राप्त किया। इसके साथ ही नगर परिषद के विभिन्न टेंडरों में भी उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता सिद्ध हुई, जो कि जननिधि पद की गरिमा और कानूनी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
जनसुनवाई से शुरू हुई जांच, कोर्ट के निर्देश पर हुई निर्णायक कार्रवाई
शिकायतकर्ता माणकलाल डिंडोर द्वारा जनसुनवाई में साक्ष्यों के साथ दर्ज कराई गई इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा था। हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ के निर्देशों का पालन करते हुए कलेक्टर अजय कटेसरिया ने दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेजों के सूक्ष्म परीक्षण के बाद आरोपों को पूरी तरह सही पाया। दोष सिद्ध होते ही कलेक्टर ने त्वरित कड़ा कदम उठाते हुए सिसोदिया को निर्वाचित पार्षद पद से ही बेदखल कर दिया, जिससे उनकी उपाध्यक्ष की कुर्सी भी स्वतः चली गई है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
सत्ताधारी दल से जुड़े जनप्रतिनिधि पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में हुई इस सख्त कार्रवाई ने क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। प्रशासन के इस कड़े संदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि शासकीय तंत्र और जननिधि पद का उपयोग निजी व्यावसायिक लाभ के लिए करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
Hemant Bhatt