धर्म संस्कृति : सरलता, निरहंकारिता, निस्वार्थ प्रेम एवं निर्माणता की प्रतिमूर्ति मम्मा ने विश्व को दी आध्यात्मिक दिशा

धर्म संस्कृति : सरलता, निरहंकारिता, निस्वार्थ प्रेम एवं निर्माणता की प्रतिमूर्ति मम्मा ने विश्व को दी आध्यात्मिक दिशा

ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा

⚫ आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाई 61 वीं पुण्यतिथि

हरमुद्दा
रतलाम, 25 जून। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के दिव्य दर्शन भवन, डोंगरे नगर में ब्रह्माकुमारीज की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) के 61वें पुण्य स्मृति दिवस को "आध्यात्मिक ज्ञान दिवस" के रूप में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम में आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिलीप नलगे, लोक अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय, ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, ब्रह्माकुमारी गीता दीदी सहित अनेक भाई-बहन उपस्थित रहे।

फैलाया आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने मातेश्वरी जगदम्बा के दिव्य जीवन एवं अलौकिक विशेषताओं से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मम्मा गंभीरता, दिव्यता, निर्मलता, सरलता और निरहंकारिता की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने अपने तपस्वी जीवन और मधुर व्यक्तित्व के माध्यम से विश्वभर में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश फैलाया। मम्मा के हृदय में प्रत्येक आत्मा के प्रति असीम प्रेम, स्नेह और सम्मान की भावना थी। उनके सशक्त नेतृत्व, मातृत्व भाव और आध्यात्मिक शक्ति के कारण सभी उन्हें प्रेमपूर्वक "मम्मा" कहकर संबोधित करते थे। उनके समीप आने वाली आत्माएँ अपनी कमी-कमजोरियों को भूलकर नई शक्ति, उत्साह और आत्मविश्वास का अनुभव करती थीं। मातेश्वरी जगदंबा ने उस युग में नारी नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत किया जब महिलाओं का  सामाजिक नेतृत्व सीमित था।

लोगों के जीवन में आया सकारात्मक परिवर्तन

आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिलीप नलगे ने कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा का जीवन आध्यात्मिकता, अनुशासन और सेवा का अद्भुत संगम था। उन्होंने अपने श्रेष्ठ संस्कारों एवं दिव्य गुणों से असंख्य लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर मानवता की अमूल्य सेवा की।

उनका समर्पण समाज के लिए उदाहरण

लोक अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मम्मा का जीवन हमें आत्मिक मूल्यों को अपनाकर श्रेष्ठ चरित्र निर्माण की प्रेरणा देता है। उनका त्याग, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण है।

मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा जीवन

ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने कहा कि मम्मा ने अपने जीवन द्वारा यह सिद्ध किया कि सच्ची महानता विनम्रता, प्रेम और सेवा में निहित होती है। उनका संपूर्ण जीवन ईश्वरीय ज्ञान, योग और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा, जो आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के अंत में सभी भाई-बहनों द्वारा मातेश्वरी जगदम्बा को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।