​शादी का झांसा देकर SC महिला से दुष्कर्म करने वाले दोषी को आजीवन कारावास

​शादी का झांसा देकर SC महिला से दुष्कर्म करने वाले दोषी को आजीवन कारावास

⚫ रतलाम न्यायालय का बड़ा फैसला

⚫ ​शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म, फिर मुकरा

⚫ ट्रैक्टर के शोरूम में कार्य करती थी पीड़ित महिला

हरमुद्दा
​रतलाम, 1 अक्टूबर। अनुसूचित जाति की महिला को शादी का झांसा देकर लगातार दुष्कर्म करने और जातिसूचक शब्दों के आधार पर शादी से इनकार करने वाले आरोपी को रतलाम के विशेष न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) रविन्द्र प्रताप सिंह चुण्डावत की अदालत ने आरोपी जगमोहन जोशी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और कुल 2000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

​शादी का झांसा देकर किया दुष्कर्म, फिर मुकरा

​उपनिदेशक अभियोजन आशा शाक्यवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला जनवरी 2024 में एक ट्रैक्टर शोरूम में कार्यरत थी। इस दौरान व्हाट्सएप के जरिए उसकी पहचान धार जिले के घाटा बिल्लोद निवासी जगमोहन पिता ओमप्रकाश जोशी (उम्र 22 वर्ष) से हुई। आरोपी ने पीड़िता को बताया था कि वह रतलाम में बजाज फाइनेंस कंपनी में काम करता है।
​घटना का क्रम: 29 जनवरी 2024 को आरोपी ने पीड़िता को फोन कर जावरा से रतलाम बुलाया और अजंता टॉकीज रोड स्थित अपने किराए के कमरे में ले जाकर शादी का झांसा देकर उसकी मर्जी के खिलाफ दुष्कर्म किया। इसके बाद भी आरोपी लगातार उसे अपने कमरे पर बुलाकर शारीरिक शोषण करता रहा।

​जातिसूचक इनकार और धमकी

20 जून 2024 को भी आरोपी ने पीड़िता से दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी ने यह जानते हुए भी कि पीड़िता अनुसूचित जाति से है, शादी करने से साफ इनकार कर दिया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।

​परिवार के सहयोग से दर्ज कराई प्राथमिकी

​धमकी के डर से घबराई पीड़िता ने बाद में हिम्मत जुटाकर पूरी आपबीती अपनी मां और बहन को बताई। इसके बाद परिजनों के साथ थाना स्टेशन रोड रतलाम पहुंचकर आरोपी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की गहन विवेचना के बाद न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत किया।

न्यायालय का कड़ा फैसला

माननीय न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर जगमोहन जोशी को गंभीर धाराओं में दोषी पाया। 30 सितंबर 2026 को सुनाए गए निर्णय (वि.प्र.क्रं. 75/2024) में दोषी को निम्नलिखित सजा सुनाई गई। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(एन): आजीवन कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड।
​SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(अ): आजीवन कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड।
​प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक योगेश कुमार तिवारी द्वारा की गई।