सामाजिक सरोकार : रतलाम में 90 पार बुजुर्गों का सम्मान
⚫ सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों की अनूठी मिसाल
⚫ बुजुर्गों के प्रति कृतज्ञता ही हमारी संस्कृति
हरमुद्दा
रतलाम, 1 अक्टूबर। समाज में बुजुर्ग केवल उम्र का आंकड़ा नहीं, बल्कि हमारे अनुभवों और संस्कारों की समृद्ध धरोहर हैं। इसी सोच और सामाजिक सरोकार को जीवंत करते हुए 1 अक्टूबर को वृद्धजन दिवस के अवसर पर भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी और सामाजिक न्याय विभाग, जिला रतलाम के संयुक्त तत्वाधान में एक प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया।सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करते हुए इस आयोजन में शहर के सभी समाजों के 90 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ जनों का भावभीना सम्मान किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर महापौर प्रहलाद पटेल, निगम अध्यक्ष मनीषा शर्मा, विकास प्राधिकरण अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, एडीएम बृजेंद्र रावत, रेडक्रॉस चेयरमैन प्रितेश गादिया, मनीष रावल, एल्डरमैन हेमंत राहोरी एवं सामाजिक न्याय उपसंचालक संध्या शर्मा विशेष रूप से मंचासीन रहे।

बुजुर्गों के प्रति कृतज्ञता ही हमारी संस्कृति
अतिथियों ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि रेडक्रॉस और सामाजिक न्याय विभाग दोनों ही संस्थाएं निस्वार्थ भाव से मानव सेवा में समर्पित हैं। रतलाम की पावन माटी पर 90 से अधिक उम्र के बुजुर्गों का सम्मान करना हमारी सनातन संस्कृति और परंपराओं को फिर से जीवंत करने जैसा है।
वृद्ध आश्रम के 16 बुजुर्ग शामिल वरिष्ठजनों में
समारोह में 80 से अधिक वरिष्ठ जनों का अभिनंदन किया गया, जिसमें वृद्धाश्रम के 16 बुजुर्ग भी शामिल थे। मंचासीन अतिथियों, रेडक्रॉस के संचालक मंडल तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बुजुर्गों को शॉल, श्रीफल, माला और अभिनंदन पत्र सौंपकर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। विभिन्न समाज प्रमुखों ने भी वरिष्ठ जनों को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
जागरूकता और संदेश: नुक्कड़ नाटक एवं नशा मुक्ति रैली

केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि यह आयोजन समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का जरिया भी बना। जन अभियान परिषद और सहयोगी संस्थाओं के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक चेतना और बुजुर्गों की देखभाल का संदेश दिया। इसके साथ ही, युवाओं को नशामुक्त और जागरूक बनाने के उद्देश्य से 'नशा मुक्ति रैली' का भी शुभारंभ किया गयाक।

यह आयोजन स्पष्ट संदेश देता है कि जब तक हम अपने बुजुर्गों का सम्मान करेंगे और सामाजिक समरसता के धागे में बंधे रहेंगे, तब तक हमारा समाज सुदृढ़ और संवेदनशील बना रहेगा। कार्यक्रम का संचालन सुनील पारीक ने किया। अंत में अशोक जैन ने सभी उपस्थित जनों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
Hemant Bhatt