प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल: नवागत कलेक्टर अजय कटेसरिया का फरमान—'पेपरलेस ई-ऑफिस चलेगा, लेकिन मीडिया से दूरी रहेगी'
⚫ कुशल प्रबंधन वही, जहां जनसुनवाई की जरूरत न पड़े'
⚫ आमजन से मिलने पर ढुलमुल जवाब
⚫ प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठते सवाल
हरमुद्दा
रतलाम, 5 अगस्त। नवागत कलेक्टर अजय कटेसरिया ने पदभार संभालते ही जिले के प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह ई-ऑफिस प्रणाली पर शिफ्ट करने का बड़ा फैसला लिया है। हालांकि, अपनी पहली ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के साथ संवाद को लेकर दिए गए बयानों के बाद जिले के मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।

ई-ऑफिस से पेपरलेस वर्क पर जोर
कलेक्टर कटेसरिया ने स्पष्ट किया कि रतलाम में अब ई-ऑफिस प्रणाली लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिले में पेपरलेस वर्क को प्राथमिकता दी जाएगी और अब सभी प्रशासनिक काम-काज इसी डिजिटल सिस्टम के जरिए संचालित होंगे। इसमें पारदर्शिता बनी रहेगी। यहां तक कि अधिकारियों और कर्मचारियों के छुट्टी के आवेदन भी अब ई-ऑफिस के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
'कुशल प्रबंधन वही, जहां जनसुनवाई की जरूरत न पड़े'
जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनता की समस्याओं के निवारण पर अपना दृष्टिकोण रखते हुए नवागत कलेक्टर ने कहा कि एक आदर्श और कुशल प्रबंधन वही माना जाता है, जिसमें व्यवस्थाएं इतनी सुदृढ़ हों कि आम नागरिकों को अपनी समस्याओं को लेकर जनसुनवाई में आने की नौबत ही न पड़े।
मीडिया और संवाद को लेकर सख्त रुख
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कलेक्टर का सबसे विवादित और चर्चा का विषय बना रुख पत्रकारों के प्रति उनका रवैया रहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि: उन्हें पेपर पढ़ने का कोई शौक नहीं है।
किसी भी खबर पर पत्रकारों को अपना 'वर्जन' (प्रशासनिक पक्ष) देने की उनकी कोई मंशा नहीं है। यदि कोई पत्रकार मैसेज भेजता है, तो एकाध मैसेज देख लेंगे; वरना बार-बार मैसेज भेजने वालों को सीधे नजरअंदाज कर दिया जाएगा।
आमजन से मिलने पर ढुलमुल जवाब
आम जनता से मिलने का समय क्या रहेगा ? इस मुद्दे पर उनका कहना था कि मैं कभी भी उनसे मिल सकता हूं। इसके लिए कोई समय तय नहीं है, लेकिन यह भी जरूरी नहीं है कि हर समय मैं मिलूं ही। मिलने के लिए आगंतुकों को कम से कम आधा घंटा तो इंतजार करना पड़ेगा।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठते सवाल
नवागत कलेक्टर का यह रुख जिले के मीडिया जगत में चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर ई-ऑफिस और डिजिटल कार्यप्रणाली से शासन में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) से संवाद कम करने और नागरिकों तक प्रशासनिक पक्ष पहुंचाने की व्यवस्था को दरकिनार करने के इस फैसले पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। लगता है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार में सतना कलेक्टर कार्यकाल के दौरान जमीन घोटाले प्रकरण के चलते मीडिया से दूरी बनाकर रखना चाहते हैं। क्योंकि प्रकरण में गंभीर आरोप भी लगे थे और सिद्ध भी हो गए थे मगर जब डॉक्टर मोहन यादव सरकार आई तो दूसरी बार के अभिभमत पर संभागायुक्त ने क्लीन चिट दे दी थी। तभी से फील्ड की बजाय ऑफिस वर्क देख रहे थे।
Hemant Bhatt